
स्व.मिर्ज़ा हसन बेग बिलासपुर हाकी के लौह पुरुष…
बिलासपुर–मिर्ज़ा हसन बेग गुदड़ी का एक ऐसा लाल जो आर्थिक कठिनाइयो का सामना करते हुए न केवल वकालत पास की,बल्कि खुद को एक राजनीतिज्ञ भी सिद्ध किए। स्व. हसन बेग राष्ट्रीय स्तर के तो नहीं, किन्तु राज्य स्तर के एक बहुत अच्छे हाकी खिलाड़ी भी रहे। उन्होंने अपने समय मे रविशंकर यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व किए थे,पर स्व. हसन बेग को कहा जाए कि वे बिलासपुर हाकी का लौह पुरुष हैं तो इसमें कोई अति श्योक्ति नही होंगी।
एक समय था ज़ब बिलासपुर हाकी के कई बेहतरीन खिलाड़ी, भारतीय हाकी के स्वर्णिम युग मे भारत का प्रतिनिधित्व नही कर सके। लेजली क्लाडियस, गफ्फार खान जरूर ऐसे खिलाड़ी रहे जिन्होंने भारतीय हाकी का प्रतिनिधित्व किया हैं, किन्तु बिलासपुर हाकी मे अन्य ऐसे और भी खिलाड़ी रहे हैं, जिन्हे यह अवसर मिल सकता था। जिसमें काशीराम रज़क, शेख मुजीब, सुधीर आनंद, आदि को यह अवसर नहीं मिल सका। राज्य की टीम से तो कम से कम एस. ए. कादिर, रसीद खान, अफरोज बख्श, रसीद खान, विजय पिल्ले, विजय सगगर, मक़सुद बेग, इंसान अली आदि प्रतिनिधित्व करने की क्षमता तो रखते ही थे। इसका मूल कारण तत्समय हाकी का कोई प्लेटफॉर्म तैयार नही था और प्रदेश मे भोपाल, जबलपुर सहित पृथक छत्तीसगढ़ के राजनांदगाव रायपुर के खिलाड़ियों तुती बोलती थी, जो उनके नियमित प्लेटफॉर्म का हिस्सा थी।
स्व. मिर्ज़ा हसन बेग ने 1977 मे एक ऐसे हाकी का प्लेटफॉर्म “आल इण्डिया स्वत्रँतता स्मारक गोल्ड कप हाकी टूर्नामेंट” का शुभारम्भ कर, और यह प्रतियोगिता बीच के एक-दो वर्षो को छोड़ लगातार 1992 तक आयोजित हुई। यह प्लेटफॉर्म ही था जिसने बिलासपुर हाकी को मोहम्मद नासीर खान (जॉनी) जैसा अंतराष्ट्रीय यूनिवर्सिटी प्लेयर दिया, और इस दौरान अनेक राष्ट्रीय एवं यूनिवर्सिटी हाकी खिलाड़ी पैदा किये। इस दौरान तैयार हुए अधिकतर हाकी खिलाड़ी रेलवे, पुलिस, एस ई सी एल वन विभाग, नगरनिगम आदि शासकीय संस्थानो अपने खेल के बलबूते नौकरिया भी हासिल की। एक तरह से 1977 से 1996 तक मे तैयार हुई हाकी की पौध न केवल अपने खेल काल मे नाम कमाई, साथ ही अपने जीवन यापन के रास्ते भी तय किये।
बिलासपुर मे आज ऐसे ही एक नर्सरी की बेहद आवश्यकता हैं, जो स्थानीय बच्चो को नशा खोरी एवं भ्रर्मित दिशा से पुनः हाकी का नया प्लेटफॉर्म दे सके। स्व. मिर्ज़ा हसन बेग स्मृति राज्य स्तरीय हाकी प्रतियोगिता इसकी एक पहल हैं। निश्चित इस प्रतियोगिता को प्रतिवर्ष कराने का प्रण हाकी के नए आयामो को स्थापित करेगा।




