सरकारी नंबर को निजी संपति मानते है अधिकारी….तत्कालीन एसपी ने अभियान चला बनाया विश्व रिकार्ड…..

बिलासपुर– पुलिस प्रशासन भले प्रेस से तालमेल की बात करते हो पर जिले मे बैठे कुछ उच्च अधिकारी स्वयं सामने नही आते हुए दूसरे के कंधे में बंदूक धरकर उसे चलाते हुए खबरों के नाम पर पत्रकारों को सूचना के लिए बनाऐ गए ग्रुप से निकलवाने का काम कर रहे है। पद का दुरुपयोग और स्वतंत्र पत्रकारिता पर एक हमले के साथ पूरे पत्रकार जगत में अपना दबदबा और पुलिसिया भय का वातावरण पैदा किया जा रहा है।कानून व्यवस्था को लेकर यदि ये साहब अपने पद की गरिमा और उसके कर्तव्य के साथ जमीनी स्तर पर काम करते तो शायद आज अपराधियों पर कानून का डर बना रहता।

वरिष्ठ पत्रकारों को रिमूव करने का काम इस तरह एक विशेष अधिकारी के कहने मे किया जा रहा है। एक तरफ जिले के एसपी खबरों को लेकर निष्पक्ष और खुलकर काम करने की बात कहते है तो वही अपने कप्तान साहब के कामो के विपरीत काम करने वाले पुलिस अधिकारी की खबरों को उजागर करना इन्हे पसन्द नही आ रहा है।
लोकतंत्र का चौथा स्तंभ और इन साहब के संबंध से पत्रकार और विभाग के लोग भी वाक़िफ़ है लेकिन साहब के गलत आदेश के आगे नत मस्तक नजर आ रहे है
एक तरफ जहाँ तत्कालीन एसपी प्रशांत अग्रवाल ने सायबर मितान अभियान के तहत करोडो लोगो को सरकारी थाने के नबरो से जोड़ कर एक रिकार्ड बनाकर प्रदेश का नाम ऊंचा कर कई अवार्ड हासिल किये थे।
वही दूसरी ओर सोशल मीडिया के जमाने मे आज की बिलासपुर पुलिस सरकारी नंबर पर सोशल मीडिया से परहेज कर रही है । इतना ही नही थानो मे बड़े बड़े अक्षरों मे थाना मे चस्पा नंबर पर अक्सर थाना प्रभारी और अधिकारी सोशल मीडिया नही चलाते है जिसके कारण लोग चाह कर भी सूचना नही दे पाते है
एक अधिकारी के नक्शे कदम पर चलते हुए थाना प्रभारियों द्वारा सरकारी फोन रिसीव नही करने की जानकारी उच्च अधिकारियों को भी है लेकिन पद के कारण खामोश है।

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