संघ के शताब्दी वर्ष पर बिलासपुर में चिंतन, संस्कृति….. समरसता और युवा दिशा पर मंथन…

बिलासपुर / संघ के शताब्दी वर्ष पर बिलासपुर में 22 मार्च 2026दिन रविवार दोपहर 3.30 बजे से सायं 5.30 बजे संपन्न हुआ | जिसमे बिलासपुर नगर एवं जिले से समस्त प्रमुखजनों की उपस्थति रही । कार्यक्रम में मुख्य वक्ता श्री कैलाश चंद्र जी ने भारतीय दर्शन, संस्कृति एवं वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति “धर्म की जय, अधर्म का नाश” का संदेश देती है, जबकि पाश्चात्य दर्शन “धर्म का पालन करने वालों की जय” की बात करता है। भारतीय दृष्टि में धर्म का अर्थ परहित, सेवा, सद्भावना और समाज कल्याण से है, जो हर प्राणी में एक ही परमात्मा का अंश देखने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने महापुरुषों एवं भगवान श्रीराम के प्रसंगों के माध्यम से “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की भावना को स्पष्ट करते हुए समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त कर समरस समाज के निर्माण पर बल दिया।
वर्तमान परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि परिवारों में संवाद की कमी के कारण युवा और उनके माता-पिता के बीच दूरी बढ़ रही है, जिससे कई युवा गलत संगति, नशे की लत, घर छोड़ने जैसी समस्याओं की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि समाज में भ्रामक परिस्थितियों के चलते लव जिहाद जैसी घटनाएँ भी बढ़ रही हैं, इसलिए युवाओं को सही मार्गदर्शन और जागरूकता की आवश्यकता है।

उन्होंने बताया कि संघ की शाखा समाज के लिए समर्पित, निःस्वार्थ भाव से कार्य करने वाले व्यक्तित्वों का निर्माण करती है। शाखा से प्रेरित होकर विद्यार्थी परिषद, भारतीय मजदूर संघ, किसान संघ, विश्व हिंदू परिषद जैसे विभिन्न संगठन समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय होकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश के समक्ष अनेक चुनौतियाँ हैं और समाज को विभाजित करने वाली शक्तियों के प्रति सजग रहना आवश्यक है। संघ द्वारा चलाए जा रहे ग्राम विकास, गौ सेवा, कुटुंब प्रबोधन, धर्म जागरण जैसे कार्यों एवं “पंच परिवर्तन” के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया जा रहा है। अपने वक्तव्य के अंत में उन्होंने सभी से आह्वान किया कि वे भारतीय संस्कृति, मूल्यों और परंपराओं को अपनाकर राष्ट्र एवं समाज के हित में कार्य करें तथा एकता, समरसता और जागरूकता का वातावरण निर्मित कर देश को सशक्त बनाने में योगदान दें ।
वक्तव्य के पश्चात प्रमुखजनों के द्वारा किए गए प्रश्नों का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा युवाओं का आकर्षण आर्थिक उपार्जन में अधिक होता है इसमें परिवार एवं समाज को मिलकर युवाओं को संस्कारित करने की आवश्यकता हैं। एक अन्य सवाल के उत्तर में यह भी स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्पष्ट विचार है कि समाज के किसी भी भेदभाव को संघ समर्थन नहीं करता है अपितु समाज में सामाजिक समरसता और सद्भाव के लिए कटिबद्ध हैं।
कार्यक्रम का समापन सभी उपस्थितजनों द्वारा वंदेमातरम् का सामूहिक गान कर किया गया।




