बिलासपुर में मानवता को झकझोरने वाली घटना…..खाली अस्थि कलश लेकर मासूम बच्चे पहुंचे थाना…..नाबालिग के पिता की अस्थियां चोरी…..अंतिम संस्कार में बाधा और संपत्ति हड़पने का आरोप

बिलासपुर– जिले के भारतीयनगर मुक्तिधाम से एक बेहद संवेदनशील और आक्रोशित कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक नाबालिग बालक के पिता की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार की पवित्र प्रक्रिया में न केवल बाधा उत्पन्न की गई, बल्कि अस्थि चोरी कर हिंदू धार्मिक परंपराओं का घोर उल्लंघन किए जाने का गंभीर आरोप लगाया गया है।
यह शिकायत नाबालिग प्रथमेश ठाकरे (12 वर्ष) एवं अनीता ठाकरे (5 वर्ष) की ओर से उनके संरक्षक मयंक वर्मा (26 वर्ष) द्वारा की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मृतक स्वर्गीय आलोक ठाकरे की मृत्यु 15 जनवरी 2026 को हुई थी और उसी दिन भारतीयनगर मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
अंतिम संस्कार में बाधा डालने का आरोप…..
शिकायत के अनुसार, हिंदू विधि-विधान के तहत मृतक को मुखाग्नि उनके नाबालिग पुत्र प्रथमेश द्वारा दी जानी थी। इस दौरान समाज के प्रतिष्ठित लोग और परिजन उपस्थित थे। इसी बीच आरोपी महिलाएं खुशबू ठाकुर उर्फ अन्नू ठाकुर एवं ज्योति पाण्डेय कथित रूप से विधि-विरुद्ध तरीके से मुक्तिधाम में प्रवेश कर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में विघ्न डालने लगीं, जिससे वहां तनावपूर्ण स्थिति निर्मित हो गई।
अस्थियों की चोरी, CCTV में कैद…..
मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब आरोप है कि दिनांक 17 जनवरी 2026 को आरोपीगण भारतीयनगर मुक्तिधाम में घुसकर मृतक की अस्थियों को झोले में भरकर चोरी कर ले गईं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपी अस्थियों को गंगा नदी में प्रवाहित करने से इंकार कर रही हैं, जो कि हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और अनिवार्य संस्कार माना जाता है।
बताया जा रहा है कि यह पूरी घटना CCTV कैमरों में स्पष्ट रूप से कैद है, जिसमें आरोपी अस्थियां ले जाते हुए दिखाई दे रहे हैं।
संपत्ति हड़पने की नीयत का आरोप….
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि मृतक आलोक ठाकरे के माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका है। आरोप है कि आरोपी मृतक के जीवनकाल में उनके संपर्क में नहीं थी और मृत्यु के बाद अचानक संपत्ति व धन की लालच में सक्रिय हुई। यहां तक कि मृतक द्वारा पूर्व में आरोपी के विरुद्ध थाना शिकायत, गुमशुदगी दर्ज कराने एवं उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका प्रस्तुत किए जाने का भी उल्लेख किया गया है।
आरोपी ज्योति पाण्डेय, जो कि मस्तूरी विकासखंड के किरारी विद्यालय में प्रधान पाठक के पद पर पदस्थ हैं,और परिवार में कभी सहयोग न करने और अब संपत्ति विवाद के नाम पर अशांति फैलाने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि ज्योति पाण्डेय पूर्व में अपने माता-पिता के अंतिम संस्कार के दौरान भी सार्वजनिक रूप से विवाद और गाली-गलौच कर चुकी हैं, जिसके चलते उन्हें समाज और परिवार से पृथक किया गया था।
पुलिस से न्याय की मांग….
नाबालिग प्रथमेश ठाकरे की ओर से अधिकारियों से मांग की गई है कि मृतक की अस्थियों को आरोपियों से तत्काल बरामद कर नाबालिग को सुपुर्द किया जाए, ताकि विधि-विधान से अस्थि विसर्जन किया जा सके।
दोनों के विरुद्ध कानून के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
यह मामला न केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ा है, बल्कि धार्मिक आस्था, मानवीय संवेदनाओं और नाबालिगों के अधिकारों से भी सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। अब देखना होगा कि प्रशासन और पुलिस इस गंभीर आरोप पर कितनी शीघ्रता और संवेदनशीलता से कार्रवाई करती है।

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