गोल्डन लाइन विस्तार: डीएमआरसी फेज-IV के तहत 1,550 मीटर टनलिंग कार्य पूर्ण…..टनलिंग ब्रेकथ्रू से दिल्ली मेट्रो नेटवर्क विस्तार को मिली नई गति: केंद्रीय मंत्री तोखन साहू…..वैश्विक सतत विकास शिखर सम्मेलन 2025 में भारत की शहरी विकास यात्रा और भविष्य की योजनाओं पर केंद्रीय मंत्री तोखन साहू का संबोधन…..

नई दिल्ली–केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने गुरुवार को  वसंत कुंज मेट्रो स्टेशन पर आयोजित टनल ब्रेकथ्रू इवेंट में भाग लिया, जो दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के फेज-IV विस्तार के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस अवसर पर केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल, दिल्ली सरकार के परिवहन, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण तथा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह एवं डीएमआरसी के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

वसंत कुंज स्टेशन, जो वर्तमान में निर्माणाधीन है, लाइन नंबर 10 – गोल्डन लाइन (एयरपोर्ट – तुगलकाबाद कॉरिडोर) का एक अभिन्न हिस्सा है। इस परियोजना में कई सेक्शनों में टनल बोरिंग मशीन (TBM) द्वारा खुदाई का कार्य किया जा रहा है, जिसमें 14 TBM सक्रिय हैं। इस अवसर पर किशनगढ़ स्टेशन से वसंत कुंज स्टेशन तक 1,550 मीटर लंबी सुरंग के सफल निर्माण का उत्सव मनाया गया।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर श्री साहू ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दिल्ली के मेट्रो नेटवर्क को और अधिक मजबूत एवं कुशल बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने डीएमआरसी के इंजीनियरों एवं श्रमिकों के परिश्रम की सराहना करते हुए कहा, “यह उपलब्धि डीएमआरसी फेज-IV के विकास को नई गति प्रदान करेगी और दिल्ली को विश्वस्तरीय मेट्रो नेटवर्क के और करीब लाएगी।”

वैश्विक सतत विकास शिखर सम्मेलन 2025

दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित वैश्विक सतत विकास शिखर सम्मेलन 2025 में केंद्रीय मंत्री श्री तोखन साहू ने भारत की सतत शहरी विकास यात्रा पर एक प्रेरक संबोधन दिया। इस द्विवार्षिक शिखर सम्मेलन का उद्देश्य भारत को वैश्विक स्थिरता और कार्बन न्यूनीकरण के क्षेत्र में अग्रणी बनाना तथा अन्य देशों के सफल मॉडलों से सीखते हुए वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) में महत्वपूर्ण
भूमिका निभाना है।

शिखर सम्मेलन में दुनिया भर से अग्रणी नेताओं, नीति-निर्माताओं और पर्यावरणविदों ने भाग लिया। अपने संबोधन में श्री साहू ने भारत की सतत विकास की अवधारणा को रेखांकित करते हुए परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy) पर जोर दिया। उन्होंने कहा,
“भारत की संस्कृति और जीवनशैली में परिपत्र अर्थव्यवस्था गहराई से समाहित है। हम प्रकृति को ईश्वर के रूप में पूजते हैं। महात्मा गांधी ने शून्य-कार्बन जीवनशैली की वकालत की थी और हमें भी उनके पदचिन्हों पर चलना चाहिए। हमें पुनः उपयोग, अपशिष्ट में कमी और पुनर्चक्रण को अपने जीवन का हिस्सा बनाना होगा।”

प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में चल रही स्वच्छ भारत मिशन और अमृत योजना (AMRUT) को भारत सरकार की स्थिरता के प्रति गंभीर प्रतिबद्धता का प्रमाण बताते हुए, श्री साहू ने जयपुर डिक्लेरेशन का उल्लेख किया, जो आगामी दस वर्षों में 3R (Reduce, Reuse, Recycle) और परिपत्र अर्थव्यवस्था के कार्यान्वयन के लिए एक ठोस कार्ययोजना प्रदान करता है।

भारत की वैश्विक नेतृत्वकारी भूमिका

श्री साहू ने भारत के G20 की सफल अध्यक्षता का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत वैश्विक स्थिरता में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा,
“सतत विकास तभी संभव है जब वह समावेशी हो। हम वैश्विक समन्वय को बढ़ावा देकर सतत विकास के नए मानक स्थापित करने के लिए कार्य कर रहे हैं।”

उन्होंने भारत में स्थायी भवन निर्माण सामग्री के विकास और उपयोग पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा,
“आज भारत न केवल पर्यावरण-अनुकूल बिटुमेन विकसित कर रहा है, बल्कि निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट (C&D waste) से सड़कों का निर्माण कर रहा है। फ्लाई ऐश ईंटों का उपयोग और स्वदेशी नवाचारों की खोज हमें हरित भविष्य की ओर ले जा रही है।”

श्री साहू ने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) की पहल GHAR (Green, Healthy, Affordable, Resilient) बिल्डिंग रेटिंग स्टैंडर्ड को अंतरराष्ट्रीय मानकों के समकक्ष बताते हुए कहा कि यह ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरण-अनुकूल भवन निर्माण को प्रोत्साहित करता है।

वन्यजीव संरक्षण और भारत की स्थिरता पहल

अपने संबोधन में श्री साहू ने भारत के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि पिछले 5-7 वर्षों में सिंह, बाघ, तेंदुए और गंगा नदी में डॉल्फिन की संख्या में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा,
“हमारा सतत विकास केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण भी हमारे राष्ट्रीय गौरव और पहचान का अभिन्न हिस्सा है।”

नवाचार और सतत विकास की ओर बढ़ते कदम

श्री साहू ने नवाचार और तकनीकी समावेशन को सतत विकास के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स से स्थिरता पर केंद्रित नवाचार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा,
“जब परंपरा और तकनीक साथ मिलती हैं, तभी हम एक सतत भविष्य की ओर बढ़ सकते हैं। हमें अपनी सर्वोत्तम प्रथाओं को वैश्विक स्तर पर साझा करना चाहिए और साथ ही अन्य देशों से सीखना भी चाहिए।

शिखर सम्मेलन के समापन पर, श्री साहू ने सभी प्रतिनिधियों, वक्ताओं और आयोजकों को उनके बहुमूल्य योगदान के लिए धन्यवाद दिया और राजस्थान सरकार एवं जयपुर शहर को इस ऐतिहासिक आयोजन की मेजबानी के लिए विशेष आभार व्यक्त किया।

उन्होंने अपने संबोधन को एक प्रेरणादायक संदेश के साथ समाप्त किया
हमें इन विचारों को केवल सम्मेलन कक्षों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। हमें इस गति को अपने शहरों, उद्योगों और समुदायों तक ले जाना होगा। सतत भविष्य की यात्रा आज से शुरू होती है – हमारे कार्यों, हमारे निर्णयों और हमारी साझा प्रतिबद्धता के साथ।

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