10 लाख की ठगी….आदिवासी की जमीन को अपना बताकर सौदा करने वाला भू-माफिया प्रफुल्ल झा फिर चढ़ा पुलिस के हत्थे…..4 महीने पहले भी दर्ज हुआ था 420 का मामला…..फर्जी मुख्तियारनामा और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए करता था ठगी…..

बिलासपुर–न्यायधानी में जमीन के नाम पर फर्जीवाड़ा और करोड़ों की ठगी करने वाले शातिर भू-माफिया प्रफुल्ल झा की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। थाना सिविल लाइन पुलिस ने पीड़ित विशालचंद्र केसरी की शिकायत पर आरोपी प्रफुल्ल झा (उम्र 48 वर्ष, निवासी भारतीय नगर, बिलासपुर) के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। आरोपी ने खुद को फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी (मुख्तियारनामा) का धारक बताकर दूसरे की जमीन और एक मृत आदिवासी महिला की जमीन को बेचे जाने योग्य बताकर 10 लाख रुपये की चपत लगाई है।

फर्जी अनुबंध और आदिवासी जमीन छुपाकर ऐंठे 10 लाख…..
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दयालबंद निवासी आवेदक विशालचंद्र केसरी ने बिलासपुर पुलिस अधीक्षक को कंप्यूटर चालित विस्तृत आवेदन प्रस्तुत किया था। शिकायत में बताया गया कि आरोपी प्रफुल्ल झा ने मौजा अमेरी (तहसील सकरी) स्थित खसरा नंबर 244/1, 244/2, 245, 246, 247, 251, 254 आदि कुल आठ खसरों की जमीनों को खुद से अनुबंधित और सामान्य वर्ग का बताकर 70 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से बेचने का सौदा 10 दिसंबर 2025 को किया था।
झा के झांसे में आकर प्रार्थी ने यूनियन बैंक बिलासपुर के चेक व RTGS (UTR: UBINH25340490650) के माध्यम से 10,00,000/- (दस लाख रुपये) अग्रिम राशि (एडवांस) के रूप में प्रफुल्ल झा को ट्रांसफर कर दिए।
बाद में जांच-पड़ताल करने पर चौंकाने वाला सच सामने आया। खसरा नंबर 232 की जमीन राजस्व रिकॉर्ड में चंद्रकली बाई (गोंड़ जाति) के नाम दर्ज पाई गई, जो एक आदिवासी महिला थीं और जिनकी मृत्यु भी हो चुकी है। नियमानुसार आदिवासी भूमि के क्रय-विक्रय हेतु कलेक्टर की पूर्व अनुमति अनिवार्य होती है, लेकिन प्रफुल्ल झा ने इस सच्चाई को छिपाकर फर्जी अनुबंध निष्पादित किया।
नागपुर का ‘फर्जी मुख्तियारनामा’ जांच में हुआ फेल…..
जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि आरोपी ने मौजा मसानगंज (जूना बिलासपुर) और तोरबा स्थित कीमती भूखंडों का अनुबंध भी 15 दिसंबर 2025 को प्रार्थी के साथ किया था। इसके लिए उसने नागपुर (महाराष्ट्र) में 29 जनवरी 2021 को पंजीकृत ‘आम मुख्तियारनामा’ (Power of Attorney) का हवाला देकर खुद को कृष्णा दुआ एवं कृष्णा गोविंद महेंद्र का अधिकृत विक्रेता बताया था।
हालांकि, पुलिस जांच में यह मुख्तियारनामा पूरी तरह कूटरचित (फर्जी) पाया गया, जो जमीन बिक्री के लिए अधिकृत ही नहीं था।
4 महीने पहले भी सिविल लाइन थाने में दर्ज हुआ था मामला……
उल्लेखनीय है कि आरोपी प्रफुल्ल झा का यह पहला मामला नहीं है। वह लंबे समय से शहर में इसी तरह का फर्जीवाड़ा करता आ रहा है। महज चार महीने पहले 10 मई 2026 को थाना सिविल लाइन बिलासपुर में उसके खिलाफ अपराध क्रमांक 631 (धारा 420) दर्ज किया गया था।
जब प्रार्थी विशालचंद्र केसरी को सिविल लाइन थाने में प्रफुल्ल झा के खिलाफ 420 की FIR दर्ज होने की जानकारी मिली, तब उन्हें अहसास हुआ कि वे भी एक संगठित जालसाजी का शिकार हो चुके हैं। आरोपी द्वारा बार-बार रजिस्ट्री टालने और संपर्क काटने के बाद मामला वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचा।
पुलिस की कार्रवाई और धाराएं
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर थाना सिविल लाइन में मामले की जांच कर आरोपी प्रफुल्ल झा के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 336, 338, एवं 340 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया गया है। पुलिस अब आरोपी की संपत्ति और उसके द्वारा पूर्व में किए गए अन्य फर्जीवाड़ों की कुंडली खंगाल रही है।



