व्यापार विहार में युवक की पिटाई का वीडियो विवादों में….ठगी के आरोपी पर एफआईआर तो दर्ज…..लेकिन भीड़ द्वारा की गई हिंसा पर चुप क्यों पुलिस? क्या अब सड़क पर होगा तालिबानी न्याय….?

बिलासपुर–व्यापार विहार में युवक उज्जवल विश्वास की पिटाई का वायरल वीडियो सामने आने के बाद से कानून व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल खड़े कर रहा है। अब यह भी सामने आ गया है कि युवक पर विभिन्न दुकानों से लाखों रुपए का सामान फर्जी चेक के जरिए खरीदने के आरोप में थाना सिविल लाइन में धारा 318(4) BNS के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। इस एफआईआर में साफ तौर पर लिखा है कि आरोपी ने कई दुकानदारों को चेक देकर ठगा,जबकि उसके खातों में रकम ही नहीं थी।पुलिस ने इस मामले में अपराध पंजीबद्ध करते हुए उक्त आरोपी युवक के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अपने कर्तव्य का पालन किया।लेकिन वहीं मारपीट के वायरल वीडियो के सामने आने के बाद भीडतंत्र के खिलाफ पुलिस की चुप्पी और भीड़ में मार खाने वाले युवक के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई होना यह कानून व्यवस्था को संभालने वाले पुलिस कर्मचारी और अधिकारियों की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रहा है।

ठगी एक गंभीर अपराध है,इसमें कोई दो राय नहीं। आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज होना चाहिए और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कड़ी कार्रवाई भी होनी चाहिए।लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या ठगी का आरोपी होने का मतलब यह है कि उसे सड़क पर आधा घंटे तक बुरी तरह पीटा जाए?

वायरल वीडियो में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि कई लोग युवक को घेरकर लगातार मारपीट कर रहे हैं। यह न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि एक ऐसी खतरनाक प्रवृत्ति है जिसमें भीड़ खुद को न्यायाधीश बन बैठती है,और सबसे चिंताजनक बात,मारपीट करने वालों के खिलाफ अभी तक किसी भी तरह की कार्रवाई की कोई सूचना नहीं है।

क्या अब यहां पर भीड़ ही फैसला सुनाएगी? क्या अब “तालिबानी कानून” चलने लगा है, जिसमें सड़क पर ही सजा दी जाती है?घटना आधे घंटे से अधिक चली, लेकिन समय पर पुलिस की मौजूदगी दिखाई नहीं दी। और अब जब कार्रवाई हो रही है, तो वह सिर्फ एक ही पक्ष पर जिससे पुलिस की कार्यशैली और पुलिस के द्वारा एकतरफ़ा रवैया अपनाकर आग में घी डाल रही है।कानून व्यवस्था तभी मजबूत मानी जाती है जब हर पक्ष पर समान कार्रवाई हो।न कि केवल उस पर जो पीटा गया है।यदि युवक ने ठगी की है, तो उसके खिलाफ मुकदमा चलना चाहिए।लेकिन जो लोग वीडियो में स्पष्ट रूप से हिंसा करते दिख रहे हैं, क्या उनके खिलाफ कानून लागू नहीं होगा?

कानून सबके लिए बराबर है।
फिर एफआईआर भी बराबर क्यों नहीं?

व्यापार विहार जैसे व्यस्त और महत्वपूर्ण इलाके में दिनदहाड़े हुई यह घटना न सिर्फ सुरक्षा प्रबंधन पर सवाल उठाती है, बल्कि पुलिस की निष्पक्षता की कसौटी पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है।

अगर ठगी अपराध है, तो भीड़ द्वारा की गई हिंसा उससे कम नहीं।और अगर एक पर FIR हो गई है, तो दूसरे पर कार्रवाई अभी तक क्यों नहीं?यही सवाल अब पूरे शहर में गूंज रहा है।

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