छत्तीसगढ़ दौरे पर सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन की टीम…… आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा-स्वास्थ्य सेवाओं का लिया जायजा……..

बिलासपुर/मुंगेली/ क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन की टीम बीते मंगलवार दो दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ पहुंची। इस दौरान टीम ने आदिवासी अंचलों में संचालित शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का जमीनी स्तर पर निरीक्षण किया।
पहले दिन अचानकमार के सुदूर वनांचल गांव में पहुंची टीम
दौरे के पहले दिन टीम मुंगेली जिले के अचानकमार टाइगर रिजर्व (ATR) के अंतर्गत सुदूर वनांचल ग्राम बम्हनी पहुंची। घने जंगलों के बीच बसे इस आदिवासी गांव में तेंदुलकर परिवार के पहुंचते ही उत्साह का माहौल बन गया।

स्थानीय महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पुष्पगुच्छ भेंट कर अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया।
यहां टीम ने सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन द्वारा वित्तीय सहायता प्राप्त “फुलवारी” केंद्रों का निरीक्षण किया, जहां बच्चों के:
पोषण आहार
स्वच्छता व्यवस्था
खेल-आधारित शिक्षा
माताओं की भागीदारी
जैसे पहलुओं को करीब से समझा।
जन स्वास्थ्य सहयोग समिति के कार्यों का अवलोकन
दौरे के दौरान टीम ने जन स्वास्थ्य सहयोग (गनियारी) संस्था द्वारा संचालित निःशुल्क शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का भी जायजा लिया।
इस अवसर पर अंजलि तेंदुलकर और सारा तेंदुलकर ने बालवाड़ी पहुंचकर आदिवासी बच्चों से मुलाकात की। उन्होंने बच्चों के रहन-सहन, खान-पान ,शिक्षा के स्तर को लेकर स्थानीय कार्यकर्ताओं से विस्तृत चर्चा की।
दूसरे दिन बिलासपुर में स्वास्थ्य सेवाओं की पड़ताल…..
दौरे के दूसरे दिन टीम बिलासपुर पहुंची, जहां गनियारी स्थित जन स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया गया।
यहां डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों से बातचीत कर उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति को समझा। साथ ही फुलवारी केंद्र और बालवाड़ी में बच्चों से भी संवाद किया।
गोपनीय रहा दौरा, गांव में पहुंचते ही फैली खबर…..
बताया जा रहा है कि तेंदुलकर परिवार का यह दौरा पूरी तरह गोपनीय रखा गया था। हालांकि, उनके गांव पहुंचते ही खबर तेजी से फैल गई और ग्रामीणों में खासा उत्साह देखने को मिला।
प्रभाव और महत्व…..
तेंदुलकर परिवार की इस यात्रा ने ग्रामीणों में नई उम्मीद और उत्साह जगाया
आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं की ओर ध्यान आकर्षित किया
जमीनी स्तर पर काम कर रही संस्थाओं के प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान दिलाई।



