
वाहवाही लेने के चक्कर में एस एस पी के आदेश का उनके ही मातहत अफसर पलीता लगा रहे……अपराधी जेल से छूट रहे……अपराध एक पर कार्रवाई अलग अलग से शहरी इलाके के पुलिस अफसरों की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिंह…… कोयला चोरी गिरोह का मामला……
पुलिस कप्तान की देखरेख में जिले का शहरी थाना पीछे रह गया और ग्रामीण थाने ने बाजी मारते हुए एक कदम आगे निकल गया…बारह दिन के भीतर ही ग्रामीण पुलिस ने कोयला हेराफेरी गैंग पर कस दिया शिकंजा….फरार दो आरोपी गिरफ्तार…शहरी थाने में दर्ज कोयला हेराफेरी गैंग के फरार आरोपियों तक पहुंचने में नाकाम….जो अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर……
बिलासपुर–पुलिस उच्चाधिकारी की मंशा पर उनके ही मातहत अफसर पलीता लगा रहे हैं । कोयला चोरी गिरोह के संगठित आपराधिक गतिविधियों को रोकने की मुहिम की हवा निकालने में लग गए।इसका सीधा लाभ अपराधियों को मिलने लगा हैं। अपराध एक हैं और शहरी व ग्रामीण थानेदारों की अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई व बीएन एस की धाराएं अलग अलग दर्ज की गई। इसका सीधा फायदा अपराधियों को मिलने लगा।शहरी थाना क्षेत्रों के पुलिसिया कार्यप्रणाली से ऐसा लग रहा कि उन्हें अपराधियों को बचाने के लिए भी बीएनएस की धाराओं को अस्त्र बनाकर फायदा पहुंचा रहे ।
कोयला अफरातफरी के एक समान मामले में एसएसपी रजनेश सिंह द्वारा कोयला चोरो पर कड़ी कार्रवाई किए जाने के निर्देश का देहात की पुलिस ने अक्षरशः पालन करते हुए मामला दर्ज किया।वहीं शहरी थाना क्षेत्र में दर्ज हुए मामले मे पुलिस कप्तान के निर्देश की धज्जियाँ उड़ाई गई। राजपत्रित अधिकारी के निर्देशन व नेतृत्व में की गई कार्रवाई मे कोयला चोरों को लाभ देने की मंशा से धारा मे हेरफेर कर दिया गया। कोल मिक्सिंग मामले में प्लॉट मालिक, संचालक, ड्राइवर, मुंशी सहित अन्य को दोनों थाना द्वारा आरोपी बनाया गया चूंकि प्रथमदृष्टिया ही यह संगठित अपराध की श्रेणी का मामला था इसलिए एसएसपी साहब से मिले निर्देश के तहत मस्तूरी पुलिस ने मामले में संगठित अपराध की धारा 111 बीएनएस एफआईआर में जोड़ते हुए कार्रवाई की।वही राजपत्रित अधिकारी के निर्देशन में की गई कार्रवाई में सकरी पुलिस द्वारा कोयला चोरों को जमानत में दिक्कत ना हो इसका ख्याल रखते हुए एफआईआर मे बीएनएस 111 जोड़ा ही नहीं गया। जिसका लाभ कोयला चोरों को हुआ। जमानत के लिए न्यायालय की शरण में पहुंचे कोयला चोर सकरी पुलिस की दरियादिली के चलते सप्ताह भर में ही जेल से छुटने में कामयाब रहे।
कोयला अफरातफरी के अलग अलग थाने में अलग अलग अपराध तो दर्ज हो गए।लेकिन इन दोनों मामले में समानता और व्यवहारिकता दोनों एक समान होने के बाद भी अलग अलग बीएनएस की धाराएं लगाना जो जांच कार्रवाई पर सवालिया निशान के साथ पुलिस की कार्रवाई और कार्यप्रणाली को लेकर उनकी अलग ही मंशा को दर्शा रही है। दरअसल कोयले के अफरातफरी के इस संगीन मामले में ग्रामीण थाने में दर्ज हुए अपराध और पुलिस की जारी विज्ञप्ति और शहरी थाने में दर्ज अपराध और पुलिस की जारी विज्ञप्ति दोनों में बीएनएस की धाराएं अलग अलग बताई गई। एक थाने में जहां कोयला अफरातफरी के मामले को संगठित अपराध की श्रेणी में रखा गया तो वहीं दूसरे थाने में इस धारा का कही पर जिक्र भी नहीं किया गया।जबकि ग्रामीण थाने में दर्ज अपराध में आरोपियों की संख्या आधा दर्जन के लगभग तो वहीं शहरी थाने में दर्ज अपराध में एक दर्जन के लगभग आरोपियो के नाम सामने आए है।उसके बाद भी ऐसी धारा का छुटना जांच कार्रवाई में संदेह पैदा करता और संबंधित मामले की देखरेख करने वाले राजपत्रित अधिकारी की कार्यशैली और उनकी मंशा पर सवालिया निशान खड़ा करता है।जहां ग्रामीण थाने ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अपने थाने स्टाफ के साथ टीम गठित कर इस मामले में सभी आरोपियों पर नकेल कसते हुए गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता पाई और इस मामले के सभी आरोपियों को जेल दाखिल करा दिया।तो वही शहर का एक शहरी थाना सम्भाल रहे राजपत्रित अधिकारी जिनके पास एंटी सायबर क्राइम यूनिट से लेकर थाने का पुलिस बल होने के बावजूद अब तक कोयले के अफरातफरी मामले में अन्य फरार आरोपियों के गिरेबान तक पहुंचने में नाकाम होते दिख रहे हैं।ये वही थाना जहां इस मामले में फरार अजय सिंह को पकड़ने में एंटी सायबर क्राइम यूनिट से लेकर थाना स्टाफ तक लगा दिया गया।
वाहवाही और चूक…….
सूत्र बताते है कि कोयले की अफरातफरी मामले का फरार आरोपी अजय सिंह को पकड़ने में सफल होने के लिए शहरी थाना के राजपत्रित अधिकारी ने पूरी रात एड़ी चोटी का जोर लगाया। यहां तक आरोपी के घर का दरवाजा तोड़कर उसे पकड़ा गया।जिसके बाद आरोपी को थानेदार के चैंबर में उस अधिकारी ने बुलाकर अपना पुलिसिया रौब भी दिखाया। इस झूठी वाहवाही और अपना पुलिसिया रौब के चक्कर में एक बड़ी चूक कर गए जिसका फायदा आरोपी को मिला और कुछ ही दिन में वह जेल से जमानत में रिहा हो गया।




