
छत्तीसगढ़ चेंबर में संवैधानिक के संशोधन को लेकर घमासान…. संभागीय अध्यक्ष कमल सोनी ने दिया इस्तीफा….बोले- संतुलित नेतृत्व और समान प्रतिनिधित्व की मांग की अनदेखी से आहत…..
बिलासपुर- छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज में संवैधानिक संशोधन और प्रतिनिधित्व के मुद्दे को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है।इसी बीच चेंबर के बिलासपुर संभाग कार्यकारी अध्यक्ष एवं संविधान संशोधन समिति के सदस्य कमल सोनी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र चेंबर के प्रदेश अध्यक्ष सतीश थोरानी को भेजा है।

दो पृष्ठों के त्यागपत्र में कमल सोनी ने कहा है कि छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज में उनके आने का उद्देश्य चेंबर के संविधान में मौजूद संवैधानिक त्रुटियों, विशेष रूप से धारा 9(1) एवं धारा 15 में आवश्यक संशोधन कराना था। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य पूरे छत्तीसगढ़ में संतुलित नेतृत्व क्षमता, समान प्रतिनिधित्व तथा सरकार के समक्ष व्यापारिक हितों की संतुलित और प्रभावी आवाज सुनिश्चित करना था।

डेढ़ साल से लगातार पत्राचार का दावा……
कमल सोनी ने आरोप लगाया कि अपने लगभग डेढ़ वर्ष के कार्यकाल के दौरान उन्होंने इस महत्वपूर्ण विषय को लेकर बार-बार पत्राचार किया, निवेदन किए और व्यक्तिगत रूप से भी ध्यान आकर्षित कराया, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस पहल नहीं की गई।
उन्होंने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि 6 अगस्त 2026 को प्रदेश अध्यक्ष को लिखे पत्र में 9 अगस्त को बिलासपुर में प्रस्तावित बैठक के एजेंडे में संविधान संशोधन का विषय शामिल करने का स्पष्ट अनुरोध किया गया था। इसके बावजूद बाद में एजेंडे से संविधान संशोधन का विषय हटा दिया गया..
‘प्रदेश में संतुलित प्रतिनिधित्व की इच्छा नहीं’……
कमल सोनी ने पत्र में कहा कि पूरे घटनाक्रम से उन्हें यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि पूरे छत्तीसगढ़ में संतुलित नेतृत्व एवं समान प्रतिनिधित्व की व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में चेंबर नेतृत्व की कोई रुचि नहीं है। उन्होंने पूर्व में किए गए आश्वासनों के अनुरूप कार्रवाई नहीं होने को वादा खिलाफी की स्थिति बताया है।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान असंतुलित संवैधानिक व्यवस्था और प्रतिनिधित्व की कमी के कारण प्रदेश के अन्य क्षेत्रों की वास्तविक भागीदारी और आवाज प्रभावी रूप से सामने नहीं आ पा रही है, साथ ही शासन की योजनाओं और व्यापारिक हितों से जुड़े अवसरों का लाभ मुख्य रूप से रायपुर एवं आसपास के क्षेत्रों तक केंद्रित होने की बात भी पत्र में कही गई है..
पद छोड़ा, लेकिन संघर्ष जारी रखने का ऐलान……
कमल सोनी ने स्पष्ट किया है कि जब तक संविधान संशोधन की प्रक्रिया शुरू नहीं होती अथवा इस संबंध में कोई ठोस एवं निर्णायक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक इस पद पर बने रहना उन्हें उचित नहीं लगता। इसी कारण उन्होंने बिलासपुर संभाग कार्यकारी अध्यक्ष, कार्यकारिणी सदस्य एवं संविधान संशोधन समिति के सदस्य पद से अपना त्यागपत्र सौंप दिया है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पद से अलग होने के बावजूद बिलासपुर ही नहीं बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के व्यापारियों के हित में संतुलित प्रतिनिधित्व एवं संतुलित नेतृत्व की व्यवस्था स्थापित होने तक उनका प्रयास और संघर्ष जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि संविधान में आवश्यक संशोधन ही पूरे छत्तीसगढ़ के व्यापारिक समाज की संतुलित मांगों, समान प्रतिनिधित्व और सभी क्षेत्रों के हितों को प्रभावी रूप से सामने रखने का सबसे उचित माध्यम है।
कमल सोनी के इस्तीफे से अब छत्तीसगढ़ चेंबर के भीतर संवैधानिक संशोधन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।



