महर्षि विश्वविद्यालय और जिला उद्योग संघ के बीच एमओयू….. विद्यार्थियों को मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार का अवसर….

बिलासपुर–महर्षि विश्वविद्यालय ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, बिलासपुर और जिला उद्योग संघ के बीच विद्यार्थियों के कौशल विकास, व्यावहारिक प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से एमओयू किया गया है। इस समझौते के जरिए विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्र का व्यावहारिक अनुभव दिलाने और उन्हें रोजगार के लिए तैयार करने की दिशा में पहल की गई है।

बीते छह महीनों में महर्षि विश्वविद्यालय ने विभिन्न औद्योगिक, शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए कई महत्वपूर्ण समझौते किए हैं। इनमें बीएनआई बिलासपुर, चैंबर ऑफ कॉमर्स बिलासपुर, ऐरेना कंप्यूटर्स लिमिटेड, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग, पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय, जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान दिल्ली, गो अनुसंधान केंद्र देवलापुर नागपुर, जीपी वर्मा कॉलेज, बिलासा कन्या महाविद्यालय सहित अन्य संस्थान शामिल हैं।

इस अवसर पर महर्षि विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. नरेश कुमार तिवारी ने कहा कि वर्तमान समय में उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए सक्षम बनाना भी है। उद्योगों के साथ इस तरह का सहयोग विद्यार्थियों को वास्तविक कार्यक्षेत्र का अनुभव देगा और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेगा।

वहीं, छत्तीसगढ़ प्रदेश उद्योग संघ के अध्यक्ष हरीश केडिया ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत कौशल विकास पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। विद्यार्थियों को सैद्धांतिक शिक्षा के साथ उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक कौशल भी मिलना चाहिए। इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग जगत के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।

जिला उद्योग संघ के अध्यक्ष सतीश शाह ने बताया कि इस एमओयू का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित करना, उन्हें इंटर्नशिप और कार्यानुभव के अवसर उपलब्ध कराना तथा उनकी तकनीकी एवं व्यावसायिक दक्षता विकसित करना है। इससे विद्यार्थियों के लिए रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी और उद्योगों को भी कुशल मानव संसाधन उपलब्ध हो सकेगा।

जिला उद्योग संघ के महासचिव शरद सक्सेना ने कहा कि इस समझौते को केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे धरातल पर लागू करने के लिए नियमित रूप से कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसके लिए विश्वविद्यालय और उद्योग संघ की ओर से समन्वयकों की नियुक्ति की जाएगी, जो आपसी विचार-विमर्श के माध्यम से योजनाओं के क्रियान्वयन और उनकी निगरानी करेंगे।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय और उद्योग संघ के पदाधिकारियों के साथ शिक्षाविद एवं अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस पहल से शिक्षा और उद्योग जगत के बीच की दूरी कम करने, विद्यार्थियों के कौशल विकास को बढ़ावा देने तथा उन्हें प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की उम्मीद जताई गई।

Related Articles

Back to top button