
अग्रज नाट्य दल के चार दिवसीम कार्यक्रम में बिलासपुर पहुंचे रघुवीर यादव…. पत्रकारों से की चर्चा……
बिलासपुर–फिल्म लगान में अपनी पहचान बनाने वाले, मुंगेरीलाल के हसीन सपने मैं अभिनय का जादू दिखने वाले, फिल्म अभिनेता तथा रंगमंच कलाकार रघुवीर यादव ने कहां है कि हर स्कूल हर कॉलेज और हर गांव में थिएटर आज के समय में होना चाहिए। आज की युवा पीढ़ी को थिएटर पढ़ाया जाना चाहिए। क्योंकि थिएटर जीने का सलीका सिखाता है । थिएटर से जुड़कर आदमी तहजीब सीखना है थिएटर खुद को पहचानना सिखाता है।

थिएटर अपने खुद के भीतर छिपे चीजों को सामने लाता है। थिएटर से बहुत कुछ सीखा जा सकता है जो जिंदगी सीखने की कला सिखाती है। और थिएटर जो सीख गया उसे जिंदगी भी छोटी लगने लगती है। आज अग्रज नाटक डाल के चार दिवसीम कार्यक्रम में पहुंचे रघुवीर यादव ने शहर में पत्रकारों से चर्चा की । उन्होंने रंगमंच और फिल्मी दुनिया से जुड़े क कई सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि मैंने अपनी जिंदगी में थिएटर से बहुत कुछ सीखा है। मैंने थिएटर में तैरना नहीं डूबना सीखा है । थिएटर हमें रसोई में खाना बनाना भी सिखाती है कलाकार है संगीत में भी रुचि है और संगीत हर चीज में मदद करती है । संगीत से जिंदगी के हर छोटे-छोटे जज्बातों को बाकी से सीखा जा सकता है म्यूजिक बच्चों को बहुत सारी चीज सिखाता है। म्यूजिक टेंशन दूर करने का बढ़िया साथी भी है और जीने का सलीका भी सिखाते है। रघुवीर यादव ने कहा है कि बॉलीवुड में मैं ईमानदारी से काम किया है 1967 से लेकर अब तक रंगमंच के लिए मैं काम कर रहा हूं और अभी भी लगता है कि बहुत कुछ करना बाकी है। उन्होंने कहा है कि थिएटर के माध्यम से हम जो पढ़ते हैं कि अभिनय करते हैं शोध करते हैं थिएटर हमें बहुत कुछ सिखाती है । नई पीढ़ी को समझ में आना चाहिए थिएटर क्या है। मैं अभी भी सीख रहा हूं हर एक्टर के लिए थिएटर में प्रशिक्षण जरूरी है एक्टिंग लब्ज ऐसा है मैं इस रंग मंच म में जोड़ रखा है मेरा काम मेरी संघर्ष मैं इसे नहीं मानता। मेहनत करते हैं तो संघर्ष करना पड़ता है।

भूखा रहना भी थिएटर है। रघुवीर यादव ने देश के प्रख्यात कलाकार हबीब तनवीर तथा सत्य देव दुबे को याद करते हुए कहा कि हबीब तनवीर ने छत्तीसगढ़ की संस्कृति नाचा गम्मत के माध्यम से संस्कृति को बचाने का काम किया है इसे संभाल कर रखना चाहिए। हमारी जमीने गायब नहीं होना चाहिए हमारे लोकगीत हमारी संस्कृति अपनी खूबियों को पहचाने खुद को जाने । उन्होंने कहा कि कलाकार को जानना चाहिए कि उनके अंदर भी एक थिएटर है थिएटर के बिना पहचान नहीं है। और एक कलाकार को थिएटर के साथ-साथ प्रशिक्षण जरूरी है। जिसे एक्टिंग नहीं आएगी वह ज्यादा समय तक रंगमैच पर नहीं टिक पाएगा। आज आज रघुवीर यादव के शहर पहुंचने पर सिम्स के डीन रमणेश मूर्ति उनकी पत्नी तथा अग्रज नाटक डाल के प्रमुख सुनील चिपड़े, श्वेता पांडे ने पुष्प कुछ से स्वागत किया । रघुवीर यादव दो दिनों तक यहां रहेंगे। और चार दिवसीय योगेश स्मृति नाटक दल में अपनी कला का प्रदर्शन भी करेंगे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा है कि आज जो फिल्में बन रही है उसमें समाज को बहुत कुछ सीखना भी चाहिए किसी अपराधी या बड़े नेतापर फिल्में बनती है उसे आज समाज कहां तक स्वीकार करेगा।



