रेलवे और नगर निगम बने जलकर बकायेदार, 20 साल से चल रहा नोटिस का खेल…..

बिलासपुर –एक तरफ आम लोगों पर पानी टैक्स न चुकाने पर नोटिसों की बौछार लग जाती है तो वहीं दूसरी ओर खुद सरकारी विभाग ही करोड़ों के बकायेदार हैं। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे और नगर निगम, दोनों ने पिछले एक-डेढ़ दशक से जल संसाधन विभाग का पानी टैक्स नहीं चुकाया है।

जल संसाधन विभाग ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे को बार-बार नोटिस भेजे हैं। आरोप है कि रेलवे ने पिछले 14-15 सालों से पानी टैक्स नहीं चुकाया है, जिसकी राशि अब 16 करोड़ से ऊपर जा चुकी है। रेलवे द्वारा वाशिंग लाइन में रोज़ाना 50 से अधिक ट्रेनों को धोने के लिए 3500 लीटर से अधिक पानी खर्च किया जाता है, जो कि कमर्शियल उपयोग की श्रेणी में आता है।

हर बार नोटिस मिलने पर रेलवे कुछ मामूली राशि जमा कर देता है, लेकिन मूल बकाया जस का तस बना रहता है। जल संसाधन विभाग की माने तो ये सिर्फ औपचारिकता भर रह गई है। वहीं आम लोग सवाल कर रहे हैं कि जब सरकारी विभाग ही नियम नहीं मानते, तो आम जनता पर सख्ती क्यों?

रेलवे के अलावा नगर निगम भी जलकर भुगतान में पीछे है। निगम पर 45.71 करोड़ रुपए का बकाया है, जो 10 सालों से लंबित है। निगम आम लोगों से टैक्स वसूलता है, लेकिन खुद विभागीय टैक्स चुकाने में नाकाम है।

इतना ही नहीं, 32 से ज्यादा उद्योग भी जलकर भुगतान नहीं कर रहे हैं। इन्होंने जल संसाधन विभाग से पानी के लिए रजिस्ट्रेशन तो करा रखा है, लेकिन करोड़ों का टैक्स बकाया छोड़ रखा है।

यह सवाल उठना लाजिमी है कि जब सरकारी विभाग ही बकायेदार हैं, तो आम जनता से टैक्स की वसूली किस नैतिकता के आधार पर की जा रही है? क्या नियम सिर्फ आम लोगों के लिए हैं?

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