
ग़रीबी,भूखमरी से तंग आकर आत्महत्या के दहलीज से फिर पीछे मुड़कर नहीं देखी….. पद्मश्री फूलबासन देवी यादव एक मुट्ठी चावल और दो रुपए के अभियान से जुड़ गई महिलाएं…..
बिलासपुर–ग़रीबी इतनी रहीं कि बचपन में स्कूल जाने के लिए ड्रेस नहीं थे । साड़ी पहनकर स्कूल जाने पर मास्टर कक्षा से भगा दिया करते थे । ले-देकर पांचवीं कक्षा तक पहुंच पाई । फिर पढ़ाई छूट गई दस साल की उम्र में शादी और बारह साल की उम्र में गवना हो गया। ससुराल में भी ग़रीबी का दंश पीछा नहीं छुटा। तन ढकने के लिए फटी साड़ी से गुजारा करना पड़ा। बच्चों की भूखमरी से तंग आकर चार बच्चों को लेकर आत्महत्या करने रेल लाइन पहुंच गई । सामने से आते ट्रेन पर उनकी दोनों बेटियों ने मां की पैर पकड़कर खाना नहीं मांगने का वास्ता दिया। फिर यहीं से नये जीवन की शुरुवात हुई ।
यह दास्तां है पद्मश्री फूलबासन देवी यादव की।सोमवार को यहां प्रेस क्लब में अनौपचारिक बातचीत में अपनी जीवनगाथा की आपबीती सुनाई ।

लाखों महिलाओं को दिखा रहीं रास्ता…..
एक मुट्ठी चावल और दो रुपए के अभियान में आज आठ लाख महिलाएं जुड़ी हैं। इनके खाते में 95 करोड़ रुपए हैं।
50 लाख की विजेता……
फूलबासन देवी यादव की प्रसिध्दी से फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन के मेगा शो कौन बनेगा करोड़पति में 50 लाख रुपए की विजेता रहीं । इस राशि से वह राजनांदगांव में आश्रम बनवा दी गई । ताकि बेसहारा , ग़रीबी से जूझ रहे लोगों को सहारा मिल सके ।
आईआईटी की डायरेक्टर…..
पांचवीं तक पढ़ी पद्मश्री यादव पांचवीं तक पढ़ी । लेकिन अब वह देश की ख्यातिलब्ध देश के आईआईटी की डायरेक्टर हैं। इन संस्थानों के छात्र-छात्राएं समूह प्रबंधन का गुर सीखने आते हैं ।
जल संरक्षण समेत सवा सौ पुरस्कार…..
फूलबासन देवी को पद्मश्री समेत राष्ट्रीय , अंतर्राष्ट्रीय के सवा सौ से अधिक पुरस्कार से अब तक सम्मानित हो चुकी है ।
दिनचर्या में बदलाव नहीं……
फूलबासन देवी यादव अब भी खपरैल पोश मकान में रहती हैं। पति आज भी चरवाहा है।बेटे मजदूरी करते हैं। फूलबासन देवी का मानना है कि संघर्ष निरंतर जारी हैं ।



