
राजनीति में 99 पर भी खेल बदल जाता है, कुछ भी फाइनल नहीं होता’ प्रेस क्लब के ‘हमर पहुना’ में कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने खोले राजनीतिक सफर के पन्ने……शहर विकास के लिए फिर प्रेस क्लब को पहल करने की जरूरत–अटल श्रीवास्तव……
बिलासपुर–कोटा विधायक एवं छत्तीसगढ़ राज्य पर्यटन मंडल के पूर्व अध्यक्ष अटल श्रीवास्तव मंगलवार को बिलासपुर प्रेस क्लब के ‘हमर पहुना’ कार्यक्रम में पहुंचे। करीब 35 साल के राजनीतिक सफर, संघर्ष, चुनावी अनुभव, राजनीतिक गुरु, पर्यटन और अपने निजी जीवन पर उन्होंने बेबाकी से बात रखी। उन्होंने कहा कि राजनीति में कभी कोई चीज अंतिम नहीं होती। “सांप-सीढ़ी के खेल में 99 पर पहुंचने के बाद भी एक आने की संभावना रहती है।”
श्रीवास्तव ने कहा कि राजनीति उनके लिए सत्ता नहीं, बल्कि जनता के काम आने का माध्यम रही है। उन्होंने अपने राजनीतिक गुरु स्वर्गीय बीआर यादव को याद करते हुए कहा कि उनसे उन्होंने सीखा कि किसी व्यक्ति की समस्या लेकर आने पर पहले यह नहीं देखना चाहिए कि वह किस राजनीतिक दल से जुड़ा है। वह उम्मीद लेकर आया है तो उसकी समस्या का समाधान कराने का प्रयास करना चाहिए।
टिकट का वादा मिला, लेकिन आखिरी वक्त में बदल गया समीकरण….
2018 के विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने के अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि संगठन और बड़े नेताओं के आश्वासन के बावजूद अंतिम समय में राजनीतिक समीकरण बदल गए। प्रदेश अध्यक्ष रहे भूपेश बघेल ने फोन कर टिकट नहीं दिला पाने की बात कही थी। उन्होंने कहा, “संघर्ष लंबा है, टिकट नहीं मिली तो कोई बात नहीं, मैं सबके काम करता रहूंगा।”
उन्होंने भूपेश बघेल के राजनीतिक निर्णयों और कार्यशैली की भी चर्चा की और कहा कि राजनीति में अंतिम समय तक परिस्थितियां बदल सकती हैं।
‘कोटा कभी जोगी परिवार का गढ़ नहीं रहा’……
कोटा विधानसभा के राजनीतिक इतिहास पर उन्होंने कहा कि कोटा को केवल जोगी परिवार की सीट के रूप में देखना सही नहीं है। उनके अनुसार, यह मूल रूप से कांग्रेस की परंपरागत सीट रही है, हालांकि अलग-अलग चुनावों में राजनीतिक परिस्थितियों के कारण परिणाम बदलते रहे हैं।
‘प्यास लगी तब कुआं खोदने जैसी स्वास्थ्य व्यवस्था’…..
साय सरकार के ढाई वर्ष के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए श्रीवास्तव ने स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क व्यवस्था को लेकर तीखे आरोप लगाए। कोटा के वनांचल क्षेत्रों में मलेरिया-डेंगू की स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बीमारी फैलने के बाद इंतजाम करने के बजाय पहले से रोकथाम की तैयारी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पहले मच्छरदानी और क्लोरीन की गोलियां जैसी व्यवस्थाएं की जाती थीं, लेकिन अब इनका अभाव दिखाई देता है।
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‘स्कूलों में शिक्षक नहीं, घोषणाओं पर भी अमल नहीं’….
शिक्षा व्यवस्था पर उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र के कई स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। आत्मानंद स्कूलों की स्थिति पर भी उन्होंने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि शुरुआत में इन स्कूलों से शिक्षा के क्षेत्र में नई उम्मीद जगी थी, लेकिन अब व्यवस्था कमजोर होती दिखाई दे रही है।
बेलगहना में महाविद्यालय और कोटा ब्लॉक में आदिवासी समाज के लिए भवन निर्माण की घोषणाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि घोषणा और धरातल के बीच अभी भी लंबी दूरी है।
‘मुख्यमंत्री पूरे छत्तीसगढ़ के हैं, केवल बस्तर के नहीं’…..
बस्तर में विकास कार्यों का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि नक्सल समस्या के कारण लंबे समय तक वहां विकास प्रभावित रहा है, इसलिए बस्तर में विकास होना जरूरी है। लेकिन मुख्यमंत्री पूरे प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। “राज्य के बाकी क्षेत्रों की सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और विकास व्यवस्था को भी समान प्राथमिकता मिलनी चाहिए।”
उन्होंने सड़कों की खराब स्थिति, टेंडर प्रक्रिया में देरी और विकास कार्यों की धीमी गति पर भी सवाल उठाए।
‘44 प्रतिशत वन नहीं, वन संपदा ही छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा यूएसपी’….
पर्यटन के सवाल पर श्रीवास्तव ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी ताकत उसका जल, जंगल, जमीन और आदिवासी संस्कृति है। इसे पर्यटन की यूएसपी बनाकर देश के पर्यटन मानचित्र पर स्थापित किया जा सकता है।
उन्होंने बस्तर, अचानकमार, कुटुमसर, कांगेर वैली, इंद्रावती सहित प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यानों, अभयारण्यों, जलप्रपातों, गुफाओं और धार्मिक स्थलों को एक व्यवस्थित पर्यटन सर्किट से जोड़ने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि पर्यटकों के लिए सबसे पहले सुरक्षा और बेहतर सुविधाओं का भरोसा जरूरी है।
उन्होंने कहा कि बरसात में छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक खूबसूरती अपने चरम पर होती है। हरियाली, पहाड़ और झरने प्रदेश की अलग पहचान बन सकते हैं।
बिलासपुर के लिए चाहिए दीर्घकालीन मास्टर प्लान….
बिलासपुर के विकास पर उन्होंने कहा कि शहर के लिए दीर्घकालीन मास्टर प्लान जरूरी है। अधिकारियों के बदलने के साथ विकास की प्राथमिकताएं बदलने से शहर का समग्र विकास प्रभावित होता है।
उन्होंने प्रेस क्लब से भी अपील की कि राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर बिलासपुर के विकास का साझा रोडमैप तैयार करने की पहल करे, जिसमें सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक वर्गों को साथ लिया जाए।
सिविल इंजीनियरिंग से राजनीति तक का सफर….
अपने निजी जीवन की चर्चा करते हुए श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी की। बाद में ठेकेदारी के व्यवसाय में आए, लेकिन सामाजिक गतिविधियों और लोगों के काम करने के दौरान राजनीति के प्रति रुचि बढ़ती गई। धीरे-धीरे व्यवसाय पीछे छूट गया और राजनीति जीवन का मुख्य क्षेत्र बन गई।
खेलों के प्रति अपने लगाव का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि वे क्रिकेट में राज्य स्तर, बैडमिंटन में विश्वविद्यालय स्तर तथा तैराकी में भी राज्य स्तर पर प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
कार्यक्रम के अंत में प्रेस क्लब की परंपरा के तहत अटल श्रीवास्तव का प्रेस क्लब अध्यक्ष अजीत मिश्रा और उनकी कार्यकारिणी सदस्यों ने शाल, श्रीफल एवं पुष्प गुच्छ भेंट कर सम्मानित किया । उन्होंने पत्रकारों और प्रेस क्लब का आभार जताते हुए कहा कि जनता से जुड़े मुद्दों पर खुला संवाद लोकतंत्र को मजबूत करता है। बिलासपुर प्रेस क्लब के शहर विकास में दिए गए योगदान का स्मरण किया । साथ ही शहर विकास के लिए फिर प्रेस क्लब को पहल करने पर जोर दिया ।



