
अज्ञेय नगर में बहुमंजिला आवासीय प्रोजेक्ट निर्माण पर ब्रेक…..नक्शे में गड़बड़ी और तथ्य छिपाने पर अनंत रियल्टी की विकास अनुज्ञा निरस्त…. नगर तथा ग्राम निवेश संचालनालय ने की कार्रवाई….
बिलासपुर–नगर तथा ग्राम निवेश संचालनालय ने अज्ञेय नगर में बहुमंजिला आवासीय प्रोजेक्ट का निर्माण कर रहे मेसर्स अनंत रियल्टी कंपनी को जारी विकास अनुज्ञा को छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम 1984 के नियम 25 के तहत प्रतिसंहृत (रिवोक) कर दिया है। यह कार्रवाई स्वीकृत अभिन्यास में गंभीर विसंगतियां, पूर्व स्वीकृत आवासीय भूखंड को मार्ग के रूप में उपयोग कर नए अभिन्यास में शामिल करने और सारवान तथ्यों के कथित दुर्व्यपदेशन के आधार पर की गई है नगर तथा ग्राम निवेश संचालनालय आयुक्त अवनीश शरण की कार्रवाई से बिल्डरों में हड़कंप मच गया है।
मामला उस विकास अनुज्ञा से जुड़ा है जिसे तथ्यों को छुपाने और ढेरो विसंगतिया होने के बावजूद 25 जून 2025 को कार्यालय संयुक्त संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश, क्षेत्रीय कार्यालय बिलासपुर द्वारा जारी किया गया था अज्ञेयनगर स्थित खसरा नंबर 15/1, 157/26 और 158/30 की करीब 0.62 एकड़ जमीन पर अनंत रियलिटी के संचालक नमन गोयल द्वारा निर्मित किए जा रहे प्रोजेक्ट को लेकर हुई शिकायतों के बाद मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी। कमेटी में संयुक्त संचालक विनीत नायर के अलावा रोहित गुप्ता, प्रतीक दीक्षित और आलोक त्रिपाठी शामिल थे।
विकास अनुज्ञा को रद्द करने से पहले आवेदक संस्था को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। निर्धारित सुनवाई में अतिरिक्त समय दिए जाने के बाद 7 अगस्त 2026 को संस्था की ओर से राजेश गोयल उपस्थित हुए और अपना जवाब तथा दस्तावेज प्रस्तुत किए। इसके बाद क्षेत्रीय कार्यालय बिलासपुर से भी स्पष्टीकरण लिया गया। पूरे मामले की जांच के लिए गठित समिति ने आवेदक संस्था और क्षेत्रीय कार्यालय के जवाबों का परीक्षण किया। समिति ने कई बिंदुओं पर कंपनी का पक्ष संतोषजनक नहीं माना।
पुराने भूखंड को रास्ता बनाकर नए अभिन्यास में शामिल करने पर सवाल….
जांच समिति के मुताबिक छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश नियम, 2020 के तहत किसी आवासीय भूखंड का भूमि के साथ विलय प्रतिबंधित है। साथ ही किसी पूर्व स्वीकृत अभिन्यास के भूखंड से मार्ग प्राप्त कर उस भूखंड को नए अभिन्यास की भूमि में शामिल कर विकास अनुज्ञा जारी करने का प्रावधान नहीं है। समिति ने पाया कि जिस भूखंड का उपयोग मार्ग के रूप में किया जा रहा था, वह पूर्व से स्वीकृत अभिन्यास का अभिन्न हिस्सा था, कोई पारंपरिक सार्वजनिक मार्ग नहीं।
समिति के अनुसार यदि इस आवासीय भूखंड का सुखाचार के रूप में उपयोग किया जाना था तो वर्ष 1989 में स्वीकृत पुराने अभिन्यास में विधिसम्मत संशोधन कराया जाना चाहिए था। लेकिन निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। यही नहीं, जांच समिति ने इसे सारवान तथ्य के कथित दुर्व्यपदेशन के आधार पर विकास अनुज्ञा प्राप्त करने का मामला माना।
मानचित्र में भी मिली विसंगति…..
जांच में स्वीकृत अभिन्यास के मानचित्र में भी गंभीर विसंगतियां सामने आईं। संस्था की ओर से इसे सलाहकार की लिपिकीय त्रुटि बताते हुए नंबरिंग में गलती होने की बात कही गई, लेकिन जांच समिति ने माना कि केवल नंबरिंग की त्रुटि बताकर अन्य विसंगतियों और अनापत्तियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
स्वीकृत विकास अनुज्ञा में 15 ब्लॉकों के प्रत्येक ब्लॉक में चार तल और प्रत्येक तल पर एक प्रकोष्ठ के अनुसार कुल 60 प्रकोष्ठ दर्शाए गए थे। वहीं स्वीकृत अभिन्यास के कुछ हिस्सों में प्रत्येक ब्लॉक में छह तल दर्शाए जाने की बात सामने आई। इससे प्रकोष्ठों की गणना के साथ-साथ EWS और LIG प्रकोष्ठों की गणना भी प्रभावित होती है।
समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि अभिन्यास स्वीकृत किए जाने से पहले आवेदक या संस्था के हस्ताक्षर लिए जाते हैं। इसलिए संस्था केवल सलाहकार की लिपिकीय त्रुटि का हवाला देकर अपनी जवाबदेही से अलग नहीं हो सकती।
शर्तों के उल्लंघन पर भी कार्रवाई…..
जांच समिति के निष्कर्ष के अनुसार आवेदक संस्था द्वारा प्रस्तुत जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। समिति ने विकास अनुज्ञा प्राप्त करने में सारवान तथ्यों के कथित दुर्व्यपदेशन और अनुज्ञा में अधिरोपित शर्तों के उल्लंघन को गंभीर माना।
क्षेत्रीय कार्यालय बिलासपुर ने भी अपने स्पष्टीकरण में स्वीकृत विकास अनुज्ञा की शर्त क्रमांक 29 और 31 के आधार पर विकास अनुज्ञा को छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम 1984 के नियम 25 के तहत प्रतिसंहृत किए जाने की अनुशंसा की।
अंततः रद्द हुई 25 जून 2025 की विकास अनुज्ञा
जांच समिति की अनुशंसा और क्षेत्रीय कार्यालय के स्पष्टीकरण के आधार पर विकास अनुज्ञा क्रमांक 1456/नग्ग्रनि/प्र.क्र.111/सी.जी.आ.00054/धारा 29/25, दिनांक 25 जून 2025 को छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम 1984 के नियम 25 के तहत प्रतिसंहृत (Revoke) कर दिया गया। इस आदेश के साथ ही अनंत रियल्टी को जारी उक्त विकास अनुज्ञा की वैधानिक स्थिति समाप्त हो गई है।



