स्वास्थ्य संचालनालय में महिला कर्मचारी की गरिमा से खिलवाड़ और नाबालिग के निजी अभिलेखों के कथित दुरुपयोग का गंभीर मामला…..संचालक एवं वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल…. प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय आयोगों से निष्पक्ष जाँच की मांग…

रायपुर·छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य सेवाएँ संचालनालय में पदस्थ एक महिला कर्मचारी ने अपनी गरिमा, प्रतिष्ठा एवं निजता तथा अपनी नाबालिग पुत्री के जन्म संबंधी निजी अभिलेखों के कथित अनुचित उपयोग को लेकर गंभीर शिकायत प्रस्तुत की है। शिकायत में संचालनालय के संचालक संजीव झा, संयुक्त संचालक प्रेमलता चंदेल एवं डॉ. निधि अत्रिवाल की भूमिका की निष्पक्ष जाँच की मांग की गई है।
यह मामला केवल एक महिला कर्मचारी की व्यक्तिगत शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी कार्यालय में प्रशासनिक अधिकारों के इस्तेमाल, महिला की गरिमा, नाबालिग की निजता और अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़े गंभीर प्रश्न उठाता है।
शिकायत में लगाए गए प्रमुख आरोप
1. कार्यालय में चरित्र संबंधी आरोपों पर स्पष्टीकरण लेने की कार्रवाई….
शिकायतकर्ता के अनुसार, एक व्यक्तिगत एवं पारिवारिक विवाद से जुड़े आरोपों के संदर्भ में उन्हें कार्यालय में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने की स्थिति का सामना करना पड़ा। उनका आरोप है कि इस दौरान उनके चरित्र तथा उनकी नाबालिग पुत्री को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की गईं। उन्होंने संबंधित कार्रवाई के औचित्य, प्रशासनिक आधार और अपनाई गई प्रक्रिया की जाँच की मांग की है।
2. नाबालिग पुत्री के जन्म अभिलेखों के उपयोग पर गंभीर सवाल
शिकायतकर्ता का कहना है कि उनकी पुत्री के जन्म प्रमाणपत्र एवं उसमें सुधार के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों का उपयोग विवादित आरोपों के संदर्भ में किया गया। उन्होंने सवाल उठाया है कि ये अभिलेख किस स्रोत से प्राप्त किए गए, किस उद्देश्य से उपयोग किए गए तथा क्या इन्हें अनावश्यक रूप से अन्य व्यक्तियों के साथ साझा किया गया।
3. वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जाँच की मांग
शिकायत में संचालक संजीव झा, संयुक्त संचालक प्रेमलता चंदेल एवं डॉ. निधि अत्रिवाल की भूमिका का अभिलेखों के आधार पर परीक्षण करने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता ने यह स्पष्ट करने की मांग की है कि कार्यालयीन कार्रवाई किसके निर्देश पर और किन नियमों के तहत प्रारंभ की गई तथा क्या किसी स्तर पर प्रशासनिक अधिकारों का अनुचित उपयोग हुआ।
4. महिला की गरिमा और बच्ची के भविष्य का प्रश्न
शिकायतकर्ता ने आशंका व्यक्त की है कि किसी नाबालिग के जन्म एवं पारिवारिक विवरणों को अपमानजनक संदर्भ में प्रस्तुत करना उसकी निजता, सामाजिक प्रतिष्ठा और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। उन्होंने बच्ची की पहचान एवं संवेदनशील जानकारी के अनावश्यक सार्वजनिक प्रसार को रोकने की मांग की है।
प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री एवं आयोगों से हस्तक्षेप की मांग….
महिला ने प्रधानमंत्री कार्यालय, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव सहित राष्ट्रीय महिला आयोग और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग से मामले पर संज्ञान लेने का अनुरोध किया है। उनकी प्रमुख मांगें हैं
स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जाँच: शिकायत में नामित अधिकारियों के प्रत्यक्ष नियंत्रण एवं प्रभाव से मुक्त जाँच व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
अभिलेखों का संरक्षण: संबंधित फाइलों, नोटशीटों, आदेशों, पत्राचार, स्पष्टीकरणों और उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखा जाए।
निजी दस्तावेजों की जाँच: नाबालिग के जन्म प्रमाणपत्र एवं संबंधित दस्तावेजों के स्रोत, प्राप्ति, उपयोग और कथित प्रसार की जाँच की जाए।
प्रशासनिक जवाबदेही: लागू सेवा नियमों, निष्पक्ष प्रक्रिया और गोपनीयता संबंधी दायित्वों के अनुपालन की समीक्षा की जाए।
नियमानुसार कार्रवाई: जाँच में आरोप प्रमाणित होने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विधिसम्मत विभागीय एवं अन्य आवश्यक कार्रवाई की जाए।
महिला एवं बाल अधिकारों की सुरक्षा: शिकायतकर्ता और उनकी नाबालिग पुत्री की गरिमा, निजता तथा संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
शिकायतकर्ता का स्पष्ट पक्ष…
शिकायतकर्ता का कहना है कि वह किसी अधिकारी को बिना जाँच दोषी घोषित करने की मांग नहीं कर रही हैं। उनकी मांग है कि पद और प्रभाव से परे, निष्पक्ष जाँच हो, प्रत्येक निर्णय का आधार अभिलेखों से स्पष्ट हो और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या अधिकारों का दुरुपयोग प्रमाणित होता है, तो जवाबदेही तय की जाए।
मुख्य सवाल जिनका जवाब जाँच से मिलना चाहिए….
महिला कर्मचारी से व्यक्तिगत आरोपों के संबंध में स्पष्टीकरण लेने की प्रशासनिक आवश्यकता और वैधानिक आधार क्या था?
नाबालिग के निजी जन्म अभिलेख किसने, किस स्रोत से और किस उद्देश्य से प्राप्त किए?
क्या संबंधित दस्तावेजों का उपयोग आवश्यक एवं सीमित प्रशासनिक उद्देश्य तक ही किया गया?
क्या पूरी प्रक्रिया में निष्पक्षता, गोपनीयता और लागू सेवा नियमों का पालन हुआ?
यदि किसी अधिकारी की भूमिका में अनियमितता सामने आती है, तो उसके विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाएगी?



