कर्मचारियों की भारी कमी से चरमराई बिजली व्यवस्था…..अभियंता संघ ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र…… लाइन स्टाफ के 50% से अधिक पद रिक्त, फाल्ट सुधार और बिजली आपूर्ति बहाली में हो रही देरी…..

बिलासपुर–छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल पत्रोपाधि अभियंता संघ के प्रांतीय महासचिव दीपक कुमार निकुंज ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर विद्युत वितरण कंपनी में तकनीकी (लाइन) कर्मचारियों की भारी कमी की ओर ध्यान आकर्षित किया है। पत्र में बताया गया कि 12,317 स्वीकृत पदों में केवल 5,747 कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 6,570 पद रिक्त हैं। कर्मचारियों की कमी के कारण लाइन फाल्ट सुधार, बिजली आपूर्ति बहाली, रखरखाव और स्मार्ट मीटरिंग जैसे कार्य प्रभावित हो रहे हैं। सीमित स्टाफ पर बढ़ते कार्यभार से दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है। संघ ने रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती की मांग की है।

छत्तीसगढ़ की बिजली व्यवस्था पर कर्मचारियों की कमी का गंभीर संकट गहराता जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल पत्रोपाधि अभियंता संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि यदि जल्द तकनीकी कर्मचारियों की भर्ती नहीं की गई तो राज्य की विद्युत वितरण व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ना तय है।

संघ के प्रांतीय महासचिव दीपक कुमार निकुंज ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में बताया कि विद्युत वितरण कंपनी में लाइन स्टाफ के कुल 12,317 स्वीकृत पद हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 5,747 नियमित कर्मचारी ही कार्यरत हैं। यानी 6,570 पद अब भी रिक्त पड़े हैं, जो कुल पदों के 50 प्रतिशत से अधिक हैं।

पत्र में कहा गया है कि कर्मचारियों की कमी के कारण लाइन फाल्ट और ब्रेकडाउन सुधार कार्यों में अत्यधिक देरी हो रही है। इससे बिजली आपूर्ति बहाल करने में ज्यादा समय लग रहा है और उपभोक्ताओं में असंतोष लगातार बढ़ रहा है। कई क्षेत्रों से शिकायतें और पत्राचार लगातार मिल रहे हैं।
संघ ने यह भी बताया कि सीमित कर्मचारियों पर अत्यधिक कार्यभार पड़ रहा है। एक कर्मचारी से कई तरह के काम लिए जा रहे हैं, जिससे कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रही हैं। नियमित संधारण और रखरखाव कार्य भी समय पर नहीं हो पा रहे, जिसका असर विभाग और शासन की छवि पर पड़ रहा है।
सबसे गंभीर चिंता सुरक्षा को लेकर जताई गई है। कई स्थानों पर तकनीकी कर्मचारियों की कमी के चलते आउटसोर्स कर्मचारियों से बिजली पोल पर चढ़कर काम कराया जा रहा है, जबकि नियमानुसार उन्हें इसकी अनुमति नहीं है। इससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।
संघ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती कर बिजली सेवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और उपभोक्ता सुविधाओं को सुनिश्चित किया जाए।

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