
बिलासपुर में स्वर्ण शुद्धता विवाद….सीज्ड मशीन की राष्ट्रीय स्तर की स्वतंत्र जांच की मांग.. एक ही आभूषण की मशीन ने पहले 20 कैरेट, फिर 916 यानी 22 कैरेट बताई शुद्धता.. सराफा संगठनों ने एसपी को सौंपा तकनीकी ज्ञापन..
बिलासपुर–शहर के सदर बाजार स्थित मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स शोरूम में सोने की शुद्धता को लेकर सामने आए विवाद ने अब तकनीकी जांच की मांग का रूप ले लिया है। बिलासपुर सराफा एसोसिएशन एवं छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन ने मामले में पुलिस अधीक्षक, बिलासपुर को विस्तृत तकनीकी ज्ञापन सौंपते हुए पुलिस द्वारा जब्त की गई मशीन की स्थानीय स्तर पर जांच कराने के बजाय राष्ट्रीय स्तर की स्वतंत्र और अधिकृत प्रयोगशाला से जांच कराने की मांग की है।
सराफा संगठनों के मुताबिक, 14 अगस्त 2026 को सदर बाजार स्थित शोरूम में सुनील कुमार केशरी ज्वेलर्स द्वारा निर्मित 22 कैरेट HUID आभूषण की शुद्धता मशीन से जांची गई। संगठन का दावा है कि मशीन ने उसी आभूषण को पहले 20 कैरेट बताया, जबकि बाद में उसी आभूषण की जांच में 916 यानी 22 कैरेट शुद्धता प्रदर्शित हुई। विवाद के बाद संबंधित मशीन को पुलिस ने जब्त कर लिया है।
मशीन की राष्ट्रीय स्तर पर जांच की मांग…..
सराफा संगठनों ने मशीन की जांच को लेकर नौ सूत्रीय तकनीकी मांग रखी है। उनका कहना है कि जांच ऐसी राष्ट्रीय स्तर की प्राधिकृत प्रयोगशाला में कराई जाए, जहां मशीन के मेक और मॉडल, कैलिब्रेशन, सॉफ्टवेयर/फर्मवेयर, संभावित छेड़छाड़, तकनीकी सटीकता और विश्वसनीयता की जांच वैज्ञानिक तरीके से हो।
इसके अलावा Certified Reference Material के माध्यम से मशीन का परीक्षण, मानक नमूनों पर जांच तथा मशीन के टेस्ट लॉग और DVR डेटा की सुरक्षा एवं सत्यापन भी जांच का हिस्सा बनाए जाने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि जांच की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और स्वतंत्र होनी चाहिए, ताकि किसी भी पक्ष के मन में संदेह की गुंजाइश न रहे।
एक ही मशीन से अलग-अलग शुद्धता बताना गंभीर मामला…..
छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि यदि एक ही मशीन द्वारा एक ही आभूषण की शुद्धता अलग-अलग बताई जाती है, तो यह बेहद गंभीर तकनीकी और व्यावसायिक मामला है। संगठन का कहना है कि यदि जांच में जानबूझकर मशीन के साथ छेड़छाड़ या गलत रिपोर्टिंग की बात सामने आती है, तो इसका प्रभाव केवल एक ग्राहक या एक प्रतिष्ठान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देशभर में सोने की शुद्धता जांच और ग्राहकों के विश्वास से जुड़ा बड़ा सवाल खड़ा हो सकता है।
संगठन ने यह भी कहा कि यदि मशीन की रिपोर्ट में अंतर जानबूझकर पैदा किया गया है तो इसकी व्यापक जांच जरूरी है, ताकि उपभोक्ताओं को ‘सस्ता सोना’ या ‘कम मेकिंग चार्ज’ जैसे दावों के नाम पर किसी तरह के भ्रामक प्रचार का सामना न करना पड़े।
‘किसी ब्रांड के विरोध में नहीं, पारदर्शिता के लिए संघर्ष’
सराफा संगठनों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी विशेष ब्रांड के विरोध में नहीं है। उनका उद्देश्य सोने की शुद्धता जांच की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और ग्राहकों के विश्वास की रक्षा करना है।
छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष कमल सोनी ने कहा कि सोना स्वयं में एक भरोसेमंद मूल्यवान धातु और ब्रांड है। इसलिए इसकी शुद्धता को लेकर किसी भी तरह की तकनीकी विसंगति सामने आने पर निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच आवश्यक है।
संगठन की ओर से बताया गया कि मांग पत्र पुलिस अधीक्षक बिलासपुर के साथ-साथ BIS रायपुर और BIS दिल्ली को भी भेजा गया है। सराफा संगठनों ने कहा है कि जब तक मामले की निष्पक्ष और तकनीकी रूप से विश्वसनीय जांच नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।



