
कोटवारों ने उठाई नियमितीकरण और वेतन वृद्धि की मांग.…..मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन……
बिलासपुर-प्रदेश के कोटवारों की वर्षों पुरानी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर आवाज बुलंद हुई है। छत्तीसगढ़ कोटवार संघ ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम जिला कलेक्टर, अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) एवं तहसीलदार के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर कोटवारों की ज्वलंत समस्याओं के शीघ्र निराकरण की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि प्रदेश के कोटवार अंग्रेजी शासनकाल से पीढ़ी-दर-पीढ़ी शासन, प्रशासन और आम जनता की सेवा करते आ रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है। वर्तमान में उन्हें बेहद कम पारिश्रमिक पर कार्य करना पड़ रहा है, जिससे परिवार का भरण-पोषण करना कठिन हो गया है। लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद मृत्यु, सेवानिवृत्ति अथवा त्यागपत्र की स्थिति में पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाता।
संघ ने ज्ञापन में सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले का भी उल्लेख किया है, जिसमें विभिन्न विभागों में लंबे समय से कार्यरत अस्थायी कर्मचारियों को 10 वर्ष की सेवा पूर्ण होने पर नियमित करने के निर्देश दिए जाने की बात कही गई है। इसी आधार पर कोटवारों ने भी राजस्व विभाग में संविलियन कर नियमित कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की है।
पारिश्रमिक बढ़ाने की मांग
कोटवार संघ ने वर्तमान पारिश्रमिक को महंगाई के अनुपात में बेहद कम बताते हुए सभी श्रेणियों के मानदेय में वृद्धि की मांग की है।
A श्रेणी (जिनके पास सेवा भूमि नहीं है) – ₹6,000 से बढ़ाकर ₹15,000 प्रतिमाह
B श्रेणी (1 से 7.50 एकड़ सेवा भूमि) – ₹5,500 से बढ़ाकर ₹12,000 प्रतिमाह
C श्रेणी (7.50 से 10 एकड़ सेवा भूमि) – ₹4,500 से बढ़ाकर ₹10,000 प्रतिमाह
D श्रेणी (10 एकड़ से अधिक सेवा भूमि) – ₹3,000 से बढ़ाकर ₹8,000 प्रतिमाह करने की मांग की गई है।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग
संघ ने आरोप लगाया कि कोटवारों की नियुक्ति में सेवानिवृत्त अथवा दिवंगत कोटवार के परिवार को प्राथमिकता देने का प्रावधान होने के बावजूद कई स्थानों पर अधिकारियों द्वारा नियमों की अनदेखी कर बाहरी लोगों की नियुक्ति की जा रही है। इससे पात्र परिवारों को न्यायालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। संघ ने नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
बेगारी और शोषण पर रोक लगाने की मांग
ज्ञापन में कहा गया है कि शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद राजस्व अधिकारियों द्वारा कोटवारों से उनके मूल दायित्वों के अलावा अन्य कार्य कराए जा रहे हैं, जो बेगारी की श्रेणी में आता है। संघ ने ऐसे आदेशों पर तत्काल रोक लगाने तथा कोटवारों का शोषण बंद करने की मांग की है।
बिना जांच कार्रवाई नहीं करने की मांग
संघ ने यह भी कहा कि कई मामलों में झूठी शिकायतों के आधार पर बिना निष्पक्ष जांच और बिना कोटवार का पक्ष सुने उन्हें निलंबित अथवा पदमुक्त कर दिया जाता है। मांग की गई है कि किसी भी शिकायत पर विधिवत जांच और संबंधित कोटवार को सुनवाई का अवसर दिए बिना कोई कार्रवाई न की जाए।
अन्य प्रमुख मांगें
नगर पालिका एवं नगर निगम क्षेत्रों में कोटवारों की नियुक्ति पर लगे प्रतिबंध को हटाया जाए।
सेवा के अनुरूप सभी कोटवारों को सामाजिक सुरक्षा एवं शासकीय सुविधाओं का लाभ दिया जाए।
राजस्व विभाग में नियमित संविलियन कर स्थायी कर्मचारी का दर्जा प्रदान किया जाए।
कोटवार संघ के संरक्षक एवं सलाहकार एस.एल. कुर्रे ने शासन से मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि यदि वर्षों से लंबित मांगों का समाधान नहीं हुआ तो प्रदेशभर के कोटवार आगे आंदोलन की रणनीति बनाने को मजबूर होंगे।



