किसानों की मांगों पर सरकार तत्काल फैसला करे….सिर्फ आश्वासन अब स्वीकार नहीं…..भारतीय किसान संघ प्रदेश के 33 जिलों में किसान सड़कों पर, ट्रैक्टरों के साथ निकली ‘बलराम किसान न्याय यात्रा….

बिलासपुर–किसानों की वर्षों से लंबित समस्याओं और सरकार की नीतियों के विरोध में भारतीय किसान संघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश के आह्वान पर आज प्रदेशभर में किसान आंदोलन के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। जिला मुख्यालयों में किसानों का जमावड़ा हुआ और विभिन्न जिलों ‘बलराम किसान न्याय यात्रा’ निकालकर मुख्यमंत्री के नाम प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया।

भारतीय किसान संघ ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि आज का आंदोलन केवल ज्ञापन देने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि किसानों की वर्षों से दबाई जा रही समस्याओं को शासन के सामने निर्णायक रूप से रखने का संघर्ष है।
संघ ने कहा कि छत्तीसगढ़ का किसान लगातार मेहनत कर प्रदेश के अन्न भंडार को भर रहा है, लेकिन जब उसके अधिकार और उसकी मेहनत की कीमत देने की बारी आती है तो उसे बकाया भुगतान, खाद की समस्या, कम कीमत, धान खरीदी मे ज्यादा तौल , सिंचाई संकट और प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
₹1700 करोड़ का बकाया कब मिलेगा…..?
भारतीय किसान संघ ने सरकार से सवाल किया है कि 2022-23 की धान खरीदी की किसानों की लगभग ₹1700 करोड़ की लंबित राशि आखिर कब मिलेगी?
किसानों को अपनी ही उपज की राशि के लिए वर्षों तक इंतजार करना पड़े, यह व्यवस्था किसानों के हित में नहीं हो सकती। संघ ने मांग की है कि लंबित राशि का तत्काल भुगतान किया जाए।
₹3358 प्रति क्विंटल की मांग पर सरकार स्पष्ट जवाब दे।किसान संघ ने कहा कि पिछले वर्षों में समर्थन मूल्य में हुई वृद्धि का वास्तविक लाभ किसानों को मिलना चाहिए।
साथ ही धान के अलावा अन्य कोई भी फसल लगाने पर 15000₹ प्रति एकड़ की दर से किसानो को कृषक उन्नति योजना के तहत लाभ मिलना चाहिए।
धान खरीदी में 40 किलो 700 ग्राम से ज्यादा नहीं होगी तौल…..
संघ ने धान खरीदी में पारदर्शिता लाते हुए प्रति तौल 40किलो 700ग्राम का नियम एक सामान लागु करने की मांग की है जिससे अतिरिक्त तौल के नाम पर किसानों पर पड़ने वाले बोझ को समाप्त किया जाए।
टोकन व्यवस्था में भी किसानों के साथ न्याय हो और छोटे एवं सीमांत किसानों को उनकी पूरी उपज बेचने का अवसर मिले।
गन्ना किसान भी जवाब मांग रहा है।भारतीय किसान संघ ने गन्ना किसानों के लिए ₹150 प्रति क्विंटल अतिरिक्त राशि/बोनस, गन्ने को कृषक उन्नति योजना से जोड़ने तथा किसानों के भुगतान को समयबद्ध करने की मांग की है।

खाद की कालाबाजारी पर कठोर कार्रवाई हो….
आंदोलन में किसानों ने खाद की उपलब्धता और निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बिक्री का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया है।
संघ ने कहा कि किसान को उसकी जरूरत के समय उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। खाद की कालाबाजारी और अधिक कीमत पर बिक्री करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
बाढ़ से हुए नुकसान का तत्काल मुआवजा……
हाल की बाढ़ से प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में किसानों की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। संघ ने मांग की है कि तत्काल खेतों का सर्वे कराया जाए और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए।
अधूरी सिंचाई परियोजनाओं पर सरकार जवाब दे…..
भारतीय किसान संघ ने कहा कि प्रदेश में अनेक सिंचाई परियोजनाएं वर्षों से अधूरी पड़ी हैं। जब तक सिंचाई की स्थायी व्यवस्था नहीं होगी, तब तक किसान मौसम की मार झेलता रहेगा।
संघ ने अरपा-भैंसाझार सहित लंबित सिंचाई परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने और नई परियोजनाओं को तत्काल स्वीकृति देने की मांग की है।
सरकार को किसान संघ की दो टूक चेतावनी
भारतीय किसान संघ ने कहा….
आज किसान जिला मुख्यालयों पर पहुंच गया है। आज ज्ञापन दिया जा रहा है, लेकिन यदि सरकार ने इन मांगों को गंभीरता से नहीं लिया और समयबद्ध समाधान नहीं किया तो यह आंदोलन आगे और व्यापक होगा। किसान अब केवल आश्वासन सुनने के लिए तैयार नहीं है।”
संघ ने कहा कि आज का आंदोलन किसानों की आवाज का प्रारंभिक चरण है। सरकार किसानों की मांगों पर तत्काल निर्णय लेकर यह स्पष्ट करे कि वह किसानों की समस्याओं का समाधान किस समय-सीमा में करेगी।
भारतीय किसान संघ ने कहा कि किसान शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपना अधिकार मांग रहा है, लेकिन अपनी जायज मांगों से पीछे नहीं हटेगा।
जिला बिलासपुर मे आंदोलन के दौरान भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री माधो सिंह ठाकुर प्रदेश कोषाध्यक्ष श्री गजानन दिघ्रस्कर जिला अध्यक्ष लक्ष्मी प्रसाद साहू उपाध्यक्ष राजु सिंह, माखन श्रीवास मंत्री राजेन्द्र मिश्रा कोषाध्यक्ष विक्रम सिंह जिला महिला प्रमुख अनिता पटेल व जिला समिति के सदस्य सभी तहसीलों के अध्यक्ष, मंत्री मातृशक्ति कुमारी कौशिक, दीपिका लाल, शिवकुमार यादवएवं भारी संख्या मे महिला पुरुष किसान भाई उपस्थित रहे।

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