मनरेगा में फर्जी डबरी निर्माण और मजदूरों की फर्जी हाजिरी का आरोप…. रोजगार सहायक के खिलाफ जांच की मांग…. बड़ी संख्या में ग्रामवासी पहुंचे कलेक्टर कार्यालय….

बिलासपुर-ग्राम पंचायत कुटेला की सरपंच उपा कुर्रे ने रोजगार सहायक शशिप्रभा कुर्रे के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए कलेक्टर से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। सरपंच ने शिकायत में मनरेगा के तहत फर्जी डबरी निर्माण, मस्टर रोल एवं मजदूरों की फर्जी हाजिरी तैयार करने, शासकीय राशि के कथित दुरुपयोग और गबन का आरोप लगाया है। शिकायत की प्रतिलिपि जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को भी दी गई है।
सरपंच के अनुसार वह कम पढ़ी-लिखी हैं और ग्राम पंचायत के मनरेगा संबंधी कार्यों की ऑनलाइन प्रविष्टि, दस्तावेज तैयार करने सहित अधिकांश कार्य रोजगार सहायक द्वारा किए जाते हैं। आरोप है कि रोजगार सहायक ने शासकीय कार्यों के नाम पर कई दस्तावेजों में उनसे हस्ताक्षर करा लिए, लेकिन संबंधित दस्तावेजों की जानकारी उन्हें नहीं दी गई।
परिवार के सदस्यों के नाम पर डबरी निर्माण दर्शाने का आरोप….
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ग्राम पंचायत कुटेला में कुछ ऐसे व्यक्तियों के नाम पर डबरी निर्माण कार्य दर्शाए गए हैं, जिनके नाम संबंधित भूमि उपलब्ध नहीं है। सरपंच ने दावा किया है कि मौके पर डबरी निर्माण नहीं होने के बावजूद दस्तावेजों में निर्माण कार्य दर्शाकर राशि का आहरण किया गया।
शिकायत के मुताबिक अभिषेक पिता भागवत के नाम करीब 99,900 रुपये, भागवत पिता बुधराम के नाम करीब 1,99,900 रुपये सहित अन्य कार्यों की राशि के संबंध में भी अनियमितता का आरोप लगाया गया है। सरपंच ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित व्यक्तियों में रोजगार सहायक के पति, सास-ससुर और अन्य पारिवारिक सदस्य शामिल हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जेसीबी से काम कराने और फर्जी हाजिरी का भी आरोप
सरपंच ने वर्तमान में स्वीकृत करीब 14.67 लाख रुपये के कार्य में भी गंभीर अनियमितता का आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार तालाब, सीसी रोड और चेकडेम आदि कार्यों के लिए स्वीकृत राशि से मजदूरों के माध्यम से काम कराने के बजाय कथित रूप से जेसीबी मशीन का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि मशीन से करीब 15 दिनों में कार्य कराया गया और इसके बावजूद बाहर कमाने गए लोगों के नाम पर फर्जी हाजिरी दर्ज की जा रही है।
सरपंच का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो इससे मनरेगा के तहत स्थानीय मजदूरों को मिलने वाले रोजगार का अधिकार प्रभावित हुआ है और सरकारी राशि के दुरुपयोग की स्थिति बनती है।
हस्ताक्षर के दुरुपयोग का भी आरोप…..
शिकायत में सरपंच ने यह भी कहा है कि रोजगार सहायक ने शासकीय कार्य बताकर उनसे विभिन्न दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करा लिए थे। बाद में ग्रामवासियों से जानकारी मिलने और दस्तावेज देखने पर उन्हें कथित रूप से पता चला कि उनके हस्ताक्षर का इस्तेमाल ऐसे दस्तावेजों में किया गया, जिनकी जानकारी उन्हें नहीं थी।
सरपंच ने कलेक्टर से पूरे मामले की स्थल निरीक्षण सहित निष्पक्ष जांच, मनरेगा के दस्तावेज, मस्टर रोल, ऑनलाइन प्रविष्टियां, भुगतान एवं कार्यों की भौतिक स्थिति की जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोष सिद्ध होने पर संबंधित रोजगार सहायक के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई करने तथा पद से हटाने की मांग की गई है।
उल्लेखनीय है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक जांच रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है। इसलिए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

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