बैंक में जमा जीवनभर की कमाई निकाले जाने का आरोप….जनदर्शन में फूट-फूटकर रोए रिटायर्ड कर्मचारी……

बिलासपुर- सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त कर्मचारी उमाशंकर दुबे ने पंजाब नेशनल बैंक में जमा अपनी जीवनभर की कमाई हुई रकम की धोखाधड़ी किए जाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बैंक में करीब 20 वर्षों से उनका खाता है और बुढ़ापे के सहारे के लिए उन्होंने रकम फिक्स्ड डिपॉजिट सहित बचत खाते में जमा कर रखी थी। उक्त रकम के संबंध में उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा उनके नाती और बैंक के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से उनकी 5 लाख रुपये की एफडी, 2 लाख रुपये की बचत राशि तथा दिसंबर माह की पेंशन कथित तौर पर निकाल ली गई।
इस मामले में बैंक के सहायक मनोज वर्मा और मैनेजर शशि भूषण की भी भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता।उन्होंने दावा किया कि जब उन्होंने अपनी रकम के संबंध में जानकारी और शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की तो उनकी शिकायत लेने से इनकार किया गया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया।
मार्च से शिकायत लेकर भटक रहे बुजुर्ग…..
श्री दुबे के अनुसार उन्होंने मार्च 2026 में मामले की शिकायत बिलासपुर एसपी, कलेक्टर, पुलिस महानिरीक्षक और कोटा थाना सहित तहसील कार्यालय में अनुविभागीय अधिकारी के समक्ष की है। उनका कहना है कि कई महीने बीत जाने के बावजूद उन्हें अब तक अपनी रकम वापस नहीं मिल पाई है और मामले में कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
मंगलवार को जनदर्शन में पहुंचे उमाशंकर दुबे अपनी शिकायत और घटना से संबंधित जानकारी लेकर अधिकारियों के समक्ष पहुंचे। मीडिया से बातचीत के दौरान वह भावुक हो गए और फूट-फूटकर रो पड़े। उनका कहना था कि यह रकम उनके बुढ़ापे का आखिरी सहारा है और अब उनकी सबसे बड़ी चिंता यही है कि किसी तरह उनकी मेहनत की कमाई उन्हें वापस मिल जाए।
‘इश्तिहार’ लेकर शहर में भटकने को मजबूर
अपनी शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने से परेशान दुबे अब अपनी समस्या को लेकर महीनों से अलग-अलग कार्यालयों और अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। वह अपनी शिकायत और कथित धोखाधड़ी से संबंधित जानकारी लेकर शहर में भटक रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने भरोसे के साथ अपनी रकम बैंक में रखी थी, लेकिन अब वही रकम उनके लिए परेशानी का कारण बन गई है।
दुबे ने लोगों से भी बैंकिंग लेन-देन में सावधानी बरतने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को बैंक खाते या जमा राशि को लेकर संदेह हो तो समय रहते अपने खातों और एफडी की जानकारी स्वयं जांचनी चाहिए।
अब देखना यह है कि बुजुर्ग की शिकायत पर संबंधित विभाग और बैंक प्रबंधन कब तक जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाते हैं और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो उनकी रकम की वापसी के लिए क्या कार्रवाई की जाती है।

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