
7 सितंबर के झगड़े से मौत तक… आखिर 5 दिन तक सोती रही सकरी पुलिस? लोखड़ी–उसलापुर क्रिकेट विवाद में युवक की मौत के बाद चार गिरफ्तार, लेकिन सवाल– मारपीट के बाद पुलिस ने क्या जांच की?…..
बिलासपुर–लोखड़ी और उसलापुर के युवकों के बीच क्रिकेट खेलने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक युवक की मौत और पुलिस की कार्रवाई पर उठते गंभीर सवालों में बदल गया है। आरोप है कि 7 सितंबर को विवाद और मारपीट के बाद भी पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। इसके बाद विवाद दोबारा बढ़ा और लोखड़ी गांव में हुई मारपीट में दो युवक घायल हुए। इनमें से एक की पांच दिन के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई।

मौत के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया है। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब विवाद 7 सितंबर से पुलिस के सामने था, तब बीच के दिनों में पुलिस ने आरोपियों की धरपकड़ और घटनाक्रम की जांच क्यों नहीं की?

पहले क्रिकेट, फिर विवाद और गांव में पहुंची मारपीट
बताया जा रहा है कि लोखड़ी गांव में कुछ युवक क्रिकेट खेलने के लिए उसलापुर से गए थे। वहां किसी बात को लेकर विवाद हुआ और युवक वापस लौट आए। आरोप है कि इसके बाद उसलापुर के कुछ युवक एकत्र होकर लोखड़ी पहुंचे और वहां युवकों को उनके घरों से निकालकर मारपीट की।इसके बाद दोनों पक्षों के बीच फोन पर भी विवाद होने की बात सामने आ रही है। मामला दोबारा भड़का और उसलापुर के युवक फिर लोखड़ी पहुंचे। इसी दौरान हुई मारपीट में दो युवक कथित तौर पर लोखड़ी में फंस गए और उनके साथ मारपीट हुई।
एक युवक की मौत, दूसरा गंभीर…..
मारपीट में घायल दो युवकों में से एक की हालत गंभीर बताई गई। उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। दूसरा घायल युवक उपचाराधीन बताया जा रहा है।युवक की मौत के बाद पुलिस हरकत में आई और चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार सभी आरोपी लोखड़ी क्षेत्र के बताए जा रहे हैं।सबसे बड़ा सवाल 7 सितंबर के बाद पुलिस ने क्या किया?पूरे मामले में पुलिस की कार्यशैली सबसे बड़ा सवाल बनकर सामने आई है।
अगर पहला विवाद 7 सितंबर को हुआ था तो 8 सितंबर को पुलिस ने क्या कार्रवाई की?9 सितंबर को विवाद की जांच क्यों नहीं हुई?दोनों पक्षों के बयान क्यों नहीं लिए गए?
संभावित आरोपियों की पहचान और पूछताछ क्यों नहीं हुई?
गांव में तनाव की स्थिति के बावजूद पुलिस ने निगरानी क्यों नहीं बढ़ाई?दूसरी मारपीट के बाद भी तत्काल प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?युवक की मौत के बाद ही गिरफ्तारी क्यों शुरू हुई?इन सवालों का स्पष्ट जवाब पुलिस से अपेक्षित है।
श्रीवास को आरोपी बनाने पर भी उठे सवाल…..
मामले में श्रीवास नामक युवक को आरोपी बनाए जाने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। परिजनों और स्थानीय लोगों का दावा है कि जिस समय घायल युवक को अस्पताल ले जाया गया, उस समय श्रीवास अपने घर में सो रहा था।
बताया जा रहा है कि लोखड़ी के सरपंच बलराम पटेल के कहने पर उसे फोन कर बुलाया गया था, जिसके बाद वह घायल को अस्पताल ले जाने के लिए गया। अब सवाल यह है कि यदि उसकी भूमिका घायल को अस्पताल पहुंचाने तक सीमित थी तो उसे आरोपी किस आधार पर बनाया गया?
हालांकि पुलिस का कहना है कि श्रीवास की भूमिका मामले में है। ऐसे में पुलिस को यह स्पष्ट करना होगा कि उसकी कथित भूमिका पहली मारपीट में थी या बाद में हुई दूसरी घटना में।

सरपंच बलराम पटेल की भूमिका पर भी सवाल…?
मामले में लोखड़ी के सरपंच बलराम पटेल की भूमिका को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। दावा है कि सरपंच ने ही श्रीवास को फोन कर घायल को अस्पताल पहुंचाने के लिए बुलाया था।ऐसे में पुलिस की जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि घटनास्थल पर कौन-कौन मौजूद था, किसने किसे बुलाया, मारपीट में किसकी क्या भूमिका रही और घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को आरोपी बनाने का आधार क्या है।स्थानीय स्तर पर बलराम पटेल के खिलाफ अन्य गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, जिनमें रेत के अवैध कारोबार से जुड़े होने के आरोप भी शामिल हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है और पुलिस को जांच के दौरान इनका सत्यापन करना चाहिए।इस मामले को लेकर सरपंच बलराम पटेल ने सभी आरोपों को निराधार बताया साथ ही उन्होंने यह भी पुलिस स्वतंत्र है वह हर तरीके से जांच करे।जिसकी जैसी संलिप्तता है उसका पुलिस उजागर करे।हम जांच में पूरा सहयोग दे रहे है।विवाद वाले दिन झगड़े की जानकारी लगते ही पुलिस को सूचना दी गई थी।
टीआई की गैरमौजूदगी ने बढ़ाया संदेह…..
घटना के बाद सकरी थाने की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि मामले में थाना प्रभारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संतोषजनक जानकारी नहीं मिली। दूसरी ओर अतिरिक्त पुलिस अधिकारी और सीएसपी स्तर के अधिकारियों के घटनास्थल/मामले में सक्रिय होने की बात सामने आई।ऐसे में सवाल यह है कि इतने संवेदनशील मामले में थाना प्रभारी की भूमिका और घटनाक्रम की निगरानी कैसी रही?
मौत के बाद ही क्यों जागी पुलिस?…..
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे गंभीर पहलू यही है कि विवाद के शुरुआती चरण में यदि पुलिस समय रहते दोनों पक्षों को बुलाकर पूछताछ करती, विवाद की वास्तविक वजह सामने लाती और संभावित आरोपियों पर कार्रवाई करती तो क्या मामला यहां तक पहुंचता?
अब एक परिवार का सदस्य दुनिया में नहीं है और पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार कर अपनी कार्रवाई बता रही है।लेकिन असली सवाल अभी भी वहीं खड़ा है।क्या यह कार्रवाई पहले हो सकती थी?और अगर हो सकती थी तो 7 सितंबर से युवक की मौत तक पुलिस ने क्या किया?इसका जवाब जांच से ज्यादा महत्वपूर्ण है।
थाने में हंगामा…..
इस पूरे मामले में पुलिस की कार्यशैली को लेकर सवाल तब खड़ा हुआ जब इस पूरे मामले में उपचार के दौरान घायल युवक की मौत हुई और सकरी पुलिस आनन फानन में शनिवार की देर रात गांव पहुंचकर पूछताछ के नाम पर चार पांच लड़कों को थाना ले जाकर हत्या के मामले में आरोपी बना देती।जिसके बाद रविवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण थाना पहुंचकर इनकी कार्यप्रणाली को लेकर आरोप प्रत्यारोप शुरू करते है।पुलिस की कार्रवाई को लेकर दिनभर थाने में हो हंगामा चलता रहा।
पंकज पटेल एडिशनल एसपी शहर…..
इनका कहना कि शराब के नशे में विवाद हुआ था।जिसके बाद यह मामला और बढ़ गया।इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।अन्य की तलाश जारी है।हत्या और बलवा का मामला कायम कर आगे की जांच की जा रही है।



