सरकारी सील भी बेअसर…..! सील मशीन से कथित खुदाई का वीडियो आया सामने….. पुलिस की सफाई पर उठे सवाल……आखिर किसके दम पर कानून को ठेंगा……?

बिलासपुर–छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में जहां एक तरफ खनिज विभाग के आला अधिकारी लगातार अवैध खनन को लेकर कार्रवाई कर रहे तो वहीं दूसरी और अवैध खनन करने वाले बेखौफ होकर अपने अवैध कार्य को अंजाम देने में आमादा है।

पौढ़ी काली धाम के सामने कथित अवैध मिट्टी खनन का मामला अब प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो गया है। कुछ दिन पहले ही खनिज विभाग ने कार्रवाई करते हुए मशीन को सील किया था। लेकिन अब सूत्रों के अनुसार उसी सील लगी मशीन से दोबारा खुदाई किए जाने का दावा किया जा रहा है। जिसका वीडियो भी सामने आने की बात कही जा रही है। यदि यह सही है, तो यह केवल अवैध खनन नहीं बल्कि सरकारी कार्रवाई और कानून दोनों को खुली चुनौती है।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने मौके पर मशीन को रोका, वीडियो बनाया और पुलिस को सूचना दी। वीडियो में मशीन पर सील लगी दिखाई देने तथा मशीन के अंदर ऑपरेटर के मौजूद होने का दावा किया जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार लगभग 30 फीट गहरी खुदाई की जा रही थी, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।

सबसे चौंकाने वाला सवाल यह है कि जब मशीन सरकारी कार्रवाई के तहत सील थी, तो वह संचालन की स्थिति में कैसे पहुंच गई? यदि सील के बाद भी मशीन चलाई जा रही थी, तो यह सीधे-सीधे सरकारी आदेश की अवहेलना का गंभीर मामला है।

सूचना मिलने के बाद भी, आरोप है कि मौके पर प्रभावी कार्रवाई के बजाय पुलिस की ओर से यह कहा गया कि वहां कोई खुदाई नहीं हो रही और मशीन सील अवस्था में खड़ी है। जबकि स्थानीय लोगों का दावा है कि सामने आया वीडियो इस सफाई पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि वीडियो और मौके की स्थिति अलग कहानी बता रहे हैं, तो वास्तविकता क्या है?

सूत्रों और स्थानीय लोगों का दावा है कि इस क्षेत्र में अवैध मिट्टी खनन का खेल कोई नया नहीं, बल्कि वर्षों पुराना है। चर्चा यह भी है कि इसी वजह से कार्रवाई के बाद भी कथित रूप से अवैध खनन करने वालों का हौसला कम नहीं हुआ। यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह केवल अवैध खनन नहीं बल्कि कानून के भय के समाप्त होने का संकेत है।

आज सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या सरकारी सील अब सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है? क्या कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है? और आखिर किसके संरक्षण के भरोसे कथित अवैध खनन करने वाले इतने बेखौफ हैं कि सील लगने के बाद भी मशीन चलाने का जोखिम उठा रहे हैं?

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