सिम्स बिलासपुर की बड़ी उपलब्धि….एक वर्ष में 10 हजार यूनिट से अधिक रक्त संग्रह, हजारों जिंदगियों को मिला नया जीवन…..

बिलासपुर–छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर ने स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। संस्थान के रक्त केंद्र ने वित्तीय वर्ष 01अप्रैल 2025 से 31मार्च 2026 के दौरान कुल **10,043 यूनिट** रक्त संग्रह कर संभाग के मरीजों के लिए जीवनरक्षक की भूमिका निभाई है। सिम्स की यह उपलब्धि न केवल संख्यात्मक है, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि संस्थान ने सिकल सेल, थैलेसीमिया और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को बिना डोनर के भी नि:शुल्क रक्त उपलब्ध कराया है।

सेवा और समर्पण का विजन……
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए संस्थान के विजन को रेखांकित किया। उन्होंने कहा:
सिम्स का मूल मंत्र केवल चिकित्सकीय उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी जरूरतमंद आर्थिक या संसाधनों के अभाव में इलाज से वंचित न रहे। हमने एक ऐसी व्यवस्था विकसित की है जहाँ सिकल सेल और थैलेसीमिया जैसी बीमारियों से पीड़ित बच्चों को बिना किसी डोनर की अनिवार्यता के नि:शुल्क रक्त दिया जा रहा है। 10 हजार यूनिट का आंकड़ा हमारे स्टाफ की मेहनत और जनता के भरोसे का परिणाम है।”

विभागाध्यक्ष पैथोलॉजी डॉ. बी.पी. सिंह (चिकित्सा अधीक्षक सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल): बेहतर प्रबंधन से सुलभ हुई राह……
रक्त केंद्र के सुदृढ़ प्रबंधन और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया:
पिछले एक साल में हमने ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और सुगम बनाया है। हमारा निरंतर प्रयास रहा है कि आपातकालीन स्थिति में आने वाले मरीजों, विशेषकर दुर्घटना पीड़ितों और गंभीर एनीमिया के मरीजों को तत्काल रक्त प्राप्त हो। बेहतर इन्वेंट्री मैनेजमेंट के कारण ही हम 33 रक्तदान शिविरों के माध्यम से भारी मात्रा में यूनिट एकत्रित कर पाए। अब सिम्स में रक्त की उपलब्धता पहले से कहीं अधिक सुगम और सुरक्षित है।

चिकित्सा अधीक्षक सिम्स डॉ. लखन सिंह सामाजिक सहभागिता और स्वैच्छिक रक्तदान पर जोर…..
रक्तदान मुहिम को जन-आंदोलन बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने वाले ने सामाजिक संगठनों के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा:
रक्त कृत्रिम रूप से नहीं बनाया जा सकता, यह केवल दान से ही संभव है। इस 10,043 यूनिट के संग्रह में उन स्वैच्छिक रक्तदाताओं का बड़ा हाथ है जिन्होंने बिना किसी पहचान के मानवता के लिए रक्तदान किया। विशेष रूप से **संत निरंकारी मंडल** जैसे संगठनों का सहयोग अनुकरणीय रहा है। मेरा युवाओं से आह्वान है कि वे आगे आएं, क्योंकि आपका एक यूनिट रक्तदान तीन जिंदगियां बचा सकता है।”

रक्त संग्रह एवं उपयोग का विश्लेषण (2025-26)…..

संस्थान ने न केवल रक्त एकत्रित किया, बल्कि उसके घटकों (Components) का भी वैज्ञानिक तरीके से वितरण किया……विवरण इकाई (यूनिट)

कुल रक्त संग्रह 10,043
| स्वैच्छिक रक्तदान (इन-हाउस) | 3,541
रक्तदान शिविर (33 शिविर) 1,340
परिजनों द्वारा (रिप्लेसमेंट) | 5,162 |

घटकों का उपयोग…..
लाल रक्त कणिकाएं……4,282 यूनिट (एनीमिया और सर्जरी हेतु)
प्लाज्मा 977 यूनिट मरीजों को एवं 2,260 यूनिट दवा निर्माण हेतु।
प्लेटलेट्स221 यूनिट (डेंगू व अन्य संक्रमण हेतु)

मानवीय पहल: बिना डोनर के नि:शुल्क रक्त…..
सिम्स प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि थैलेसीमिया और सिकल सेल के मरीजों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। इन मरीजों को बार-बार रक्त की आवश्यकता होती है, जिसे सिम्स प्राथमिकता के आधार पर बिना किसी प्रतिस्थापन (Replacement) के उपलब्ध करा रहा है। इसके साथ ही, नेगेटिव ब्लड ग्रुप के प्रबंधन के लिए एक विशेष डेटाबेस भी तैयार किया गया है ताकि संकट के समय समय न गंवाना पड़े।

अपील……

सिम्स प्रबंधन ने आम जनता से अपील की है कि वे रक्तदान को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं ताकि बिलासपुर और आसपास के क्षेत्रों में रक्त की कमी से होने वाली मौतों को शून्य पर लाया जा सके।

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