
कोल इंडिया की कमाई बढ़ी, रिटायर्ड कर्मियों का हक घटा…..ग्रेच्युटी से पेंशन तक भेदभाव का आरोप…. डेढ़ लाख मजदूरों को हर माह 300 से 600 रुपए का नुकसान….. राष्ट्रीय अध्यक्ष बोले- प्रबंधन के साथ यूनियनों की चुप्पी भी जिम्मेदार….
बिलासपुर– कोल इंडिया की बढ़ती कमाई के बीच सेवानिवृत्त कोयला कर्मियों के हक और सुविधाओं को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सेवानिवृत्त कोयला खदान मजदूर संघ ने कोल इंडिया और एसईसीएल प्रबंधन पर रिटायर्ड कर्मचारियों की लगातार उपेक्षा और भेदभाव का आरोप लगाते हुए अपनी ही ट्रेड यूनियनों को भी कठघरे में खड़ा किया है। संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह ने सोमवार को बिलासपुर प्रेस क्लब में पत्रकारवार्ता में कहा कि जिन मजदूरों ने पूरी जिंदगी कोयला उद्योग को खड़ा करने में लगा दी, सेवानिवृत्ति के बाद उन्हीं के अधिकारों और सुविधाओं पर प्रबंधन की बेरुखी भारी पड़ रही है।
उन्होंने दावा किया कि 1 अक्टूबर 2017 के बाद पेंशन निर्धारण में वेतन के महत्वपूर्ण हिस्से एसडीए को गणना से बाहर किए जाने के कारण कोल इंडिया के करीब डेढ़ लाख मजदूरों को हर महीने 300 से 600 रुपए तक कम पेंशन मिल रही है। संघ का आरोप है कि इस त्रुटिपूर्ण गणना को सुधारने और पेंशन का पुनरीक्षण करने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है, लेकिन समाधान नहीं हुआ।
ग्रेच्युटी में दोहरा पैमाना क्यों?……
संघ ने ग्रेच्युटी भुगतान को लेकर भी प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। महेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, वर्ष 2017 के बाद अधिकारियों और मजदूरों के ग्रेच्युटी लाभ में अंतर पैदा हो गया। अधिकारियों को 20 लाख रुपए तक का लाभ मिला, जबकि मजदूर 10 लाख रुपए की सीमा में अटक गए। उनका कहना है कि ग्रेच्युटी कानून में कर्मचारी की श्रेणी के आधार पर इस तरह का भेद नहीं है। संघ ने बढ़ी हुई ग्रेच्युटी का लाभ समान प्रभावी तिथि से देने के साथ पिछला बकाया भुगतान करने की मांग की है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों की परेशानी केवल ग्रेच्युटी और पेंशन तक सीमित नहीं है। चिकित्सा सुविधा और कंपनी के खाली आवासों के आवंटन में भी भेदभाव किया जा रहा है। उनका आरोप है कि एसईसीएल के कई क्वार्टर खाली पड़े-पड़े जर्जर हो रहे हैं, लेकिन जरूरतमंद सेवानिवृत्त कर्मचारियों को आवंटित नहीं किए जा रहे। दूसरी ओर, अन्य लोगों को आवास आवंटित किए जाने की शिकायतें हैं।
पांचों केंद्रीय यूनियनों पर भी निशाना……
सिंह ने बीएमएस, इंटक, एटक, सीटू और एचएमएस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि मजदूरों के कार्यकाल में उनके साथ खड़े रहने वाली यूनियनों ने सेवानिवृत्ति के बाद उनके मुद्दों को उसी ताकत से नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि प्रबंधन की कथित विभेदकारी नीति से ज्यादा पीड़ा उन संगठनों की निष्क्रियता से है, जिनसे सेवानिवृत्त कर्मियों को अपने हक की लड़ाई में उम्मीद थी।
उन्होंने बताया कि देशभर के सेवानिवृत्त कोयला कर्मियों को एक मंच पर लाने के लिए सेवानिवृत्त कोयला कर्मचारी संघ का गठन किया गया है। संघ अब पेंशन, ग्रेच्युटी, चिकित्सा और आवास समेत अन्य लंबित मांगों को लेकर प्रबंधन और सरकार पर दबाव बनाएगा।
19 को एसईसीएल स्तर पर जुटेंगे सेवानिवृत्त कर्मी…..
मांगों को लेकर 19 सितंबर को इंदिरा विहार स्थित एसईसीएल कॉलोनी के प्रियदर्शिनी भवन में सुबह 11 से शाम 4 बजे तक एसईसीएल स्तर का सम्मेलन होगा। इसमें संघ के राष्ट्रीय पदाधिकारी सेवानिवृत्त कर्मचारियों की समस्याओं और आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे। संघ ने मीडिया से भी इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की अपील की है।पत्रकारवार्ता में जोनल अध्यक्ष राम अवतार अलगमकर, मंत्री एसपी कुंडू, कार्यसमिति सदस्य भक्तिमय चौधरी, एसईसीएल जोनल महामंत्री बुद्धि सागर साही, कोषाध्यक्ष योगेश केसर, बृजेश पासवान और चंचल मित्रा मौजूद रहे।


