
भेल का ठेला,पुलिस अधिकारी की निजी गाड़ी, एम्बुलेंस,देर रात खुली दुकान….वायरल वीडियो में पुलिसिया रौब या दादागिरी…..?
बिलासपुर–पुलिसिया रौब में ड्यूटी कर रहे एसआई ने तिराहे पर अपनी निजी कार ख़डी करके यह दर्शा दिया कि शासकीय नियम कायदे आम जनता के लिए है उनके लिए नहीं। एसआई द्वारा सड़क पर गाड़ी खड़े करने से मौके पर जबरिया जाम लगा और पीछे वाहनों की लंबी कतार लग गई।एंबुलेंस को भी तिराहा क्रॉस करने के लिए एसआई के इशारे के इंतजार करना पड़ा सड़क पर बाधा बन रहे दुकानदारों पर कार्रवाई करने के बजाय मात्र भेल ठेला को एसआई ने जप्त कर कोतवाली थाना भेजा और अन्य दुकानदारों का अभयदान दिया।इस दौरान अपनी गाड़ी सड़क पर ही खड़ी रखी जिससे सड़क जाम की स्थिति बनी रही वर्दी का सम्मान और डर के चलते मौके पर मौजूद लोग खिसिया कर कहते रहे कि ऐसे ही पुलिस वालों के चलते आमजन में पुलिस की नकारात्मक छवि बनती है वायरल वीडियो में घटना की सत्यता को समझा जा सकता है।
घटना बीती रात सिम्स तिराहे की है शहर के सिम्स अस्पताल मार्ग पर देर रात हुए एक घटनाक्रम से पुलिस अधिकारी के व्यवहार पर सवाल उठ रहे हैं। घटना का वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि एक टू-स्टार पुलिस अधिकारी ने सड़क किनारे लगे भेल ठेले को हटाने की कार्रवाई के दौरान अपनी निजी कार सड़क पर खड़ी कर दी, जिससे कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भेल ठेला हटाने की इसी कार्रवाई के बीच वहां एक एम्बुलेंस पहुंची, जिसे निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ा। आरोप है कि एम्बुलेंस को तत्काल रास्ता देने के बजाय उसे किनारे से निकलने का इशारा किया गया। चूंकि यह मार्ग सिम्स अस्पताल से जुड़ा हुआ है, इसलिए घटना को लेकर लोगों ने नाराजगी भी जताई।
वही ठेले वाले को थाना ले जाते समय सिम्स चौक से थाना पहुंचने तक गोलबाजार और कोतवाली चौक के पास कुछ दुकान खुली हुई थी।उनको बंद कराने के बजाय उनके खिलाफ कार्रवाई न करते हुए काफी समय तक बीच सड़क में गाड़ी खड़ा करके यातायात को बाधित करते रहे।जिसके बाद थाना जाते समय ये यातायात के नियमों को अनदेखा करते हुए रॉन्ग साइड से थाने के तरफ जाते हुए वीडियो में देख सकते है।स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि भेल ठेला संचालक को कार्रवाई के दौरान कोतवाली थाना ले जाया गया, जहां उसे कुछ समय तक रोके रखा गया। बाद में समझाइश देकर छोड़ दिए जाने की जानकारी सामने आई है।बहरहाल वीडियो सामने आने के बाद लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि यातायात नियमों का पालन आम नागरिकों के लिए अनिवार्य है, तो क्या सरकारी अधिकारियों पर भी वही नियम समान रूप से लागू होने चाहिए। वहीं एम्बुलेंस जैसे आपातकालीन वाहन को रास्ता देने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।



